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माह-ए-रमजानः काशी में गाय के दूध से पहला रोजा खोल दिया समरसता का पैगाम

Mon, 29 May 2017 10:42 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Mon, 29 May 2017 10:42 AM IST
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ramadan first day of fasting break with cow milk
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की ओर से आयोजित हुई ‘काऊ मिल्क’ इफ्तार पार्टी - फोटो : अमर उजाला
गंगा-जमुनी तहजीब की नजीर काशी में रमजान के पहले रोजे को मुसलमानों ने गाय के दूध और खजूर से रोजा खोलकर सामाजिक समरसता का पैगाम दिया। साथ ही गो संरक्षण का संदेश दिया।
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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की ओर से आयोजित इस ‘काऊ मिल्क’ इफ्तार पार्टी में मुसलमानों के साथ हिंदू भाइयों ने भी रोजा खोला। हिंदू भाइयों ने रोजा रखकर इस्लाम धर्म के प्रति सम्मान दिखाया।
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 विशाल भारत संस्थान के हूकुलगंज स्थित परिसर में मंच के प्रदेश सह संयोजक मो. अजहरुद्दीन को संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. निरंजन श्रीवास्तव ने गाय का दूध पिलाकर रोजा खुलवाया। डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने कुरैशी समाज फाउंडेशन के रियाज को खजूर और दूध पिलाया।
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इस मौके पर रियाज कुरैशी ने कहा कि हम न गाय काटेंगे, ना ही कटने देंगे। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि पूर्वांचल भर में 200 जगहों पर रोजाना काऊ मिल्क इफ्तार पार्टी का आयोजन किया जाएगा। 

इबादत के आगे नहीं महसूस हुई गर्मी
 रमजान के पहले रोजे की बात ही कुछ और होती है। पहला रोजा रखने को लेकर बच्चे उत्साहित रहते हैं। कुछ ऐसा ही उत्साह लंका की चांदनी और सुंदरपुर की शाहिना खातून में दिखा। 10 और 11 साल की इन नन्हीं बच्चियों ने रमजान के पहले दिन अपना पहला रोजा रखा।

कोशिश तो उन्होंने पिछले साल भी की थी लेकिन गर्मी के आगे पूरा नहीं कर पाई थीं। इस साल ये ख्वाहिश पूरी की। उनका कहना था कि अल्लाह की इबादत के आगे इस बार न तो गर्मी महसूस हुई, ना भूख प्यास का एहसास हुआ। दिन भर नमाज और कुरान की तिलावत की।

रोजा रखने का सिला अल्लाह बच्चों को सौ गुना ज्यादा देता है।

इफ्तार में नजर आया मिल्लत का नूरानी मंजर

ramadan first day of fasting break with cow milk
इबादत के आगे भूख प्यास की शिद्दत रही बेमानी - फोटो : अमर उजाला
मुकद्दस रमजान के आगाज के साथ रविवार को मुसलमानों ने बड़ी अकीदत के साथ पहला रोजा रखा। सहरी से लेकर इफ्तार और तरावीह की नमाज तक इबादत का जो सिलसिला चला तो हर ओर नूरानियत का मंजर नजर आया।

गर्मी ने रोजेदारों की अकीदत को परखी ही, पहला रोजा रखने वाले बच्चों की इबादत का भी कड़ा इम्तिहान रहा। बावजूद पहले रोजे की खुशी रोजेदारों के चेहरे पर साफ झलकी। तपती गर्मी में भी भूख और प्यास के एहसास को भूलकर इबादत का दामन थामे रखा। 

शनिवार को तरावीह की नमाज के साथ रमजान की इबादत का सिलसिला शुरू हो गया था, वहीं रविवार को पहले रोजे का आगाज रोजेदारों ने भोर में सहरी से किया। नमाज के लिए मर्द और बच्चों ने मस्जिदों का रुख किया, घरों में महिलाएं इबादत में लगी रहीं। कुरान की तिलावत खूब हुई।

दोपहर बाद से ही महिलाएं इफ्तार की तैयारियों में जुट गईं। पहले दिन इफ्तार के लिए बड़े ही खास और लजीज डिश बनाए गए। इफ्तार का दस्तरख्वान अलग-अलग लजीज डिश से सजा हुआ था। शाम को 6:42 पर जैसे ही मगरिब की अजान हुई, रोजेदारों ने खजूर और शरबत से रोजा खोला।

मस्जिदों में भी सामूहिक रोजा इफ्तार हुआ, जिसमें मिल्लत का नूरानी रंग देखने को मिला। 
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