वाराणसी के रामनगर कस्बे के सिपहिया घाट में गंगा में डूबे पांचों बच्चों की मौत के बाद वारीगढ़ही और वाजिदपुर सीवान मोहल्ले में मातम छाया हुआ है। पांचों बच्चों के परिजनों के साथ ही मोहल्ले और आसपास के इलाके के लोगों की आंखों से भी आंसुओं की धार रुकने का नाम नहीं ले रही है।
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वारीगढ़ही टोला मोहल्ला में मृतक फरदीन के घर का माहौल।
इस बीच शोक में डूबे परिजनों को ढांढस बधाने के लिए शनिवार की सुबह उनके रिश्तेदारों, करीबियों, राजनेताओं और सामाजिक संगठनों के लोगों का तांता लगा रहा। रामनगर थाना के वारीगढ़ही मोहल्ले के तौसीफ, फरदीन, मोहम्मद सैफ, रिजवान और वाजिदपुर सीवान का मोहम्मद रेहान खान उर्फ लकी अपने दो अन्य दोस्तों के साथ शुक्रवार को सिपहिया घाट पर गए थे।
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वारीगढ़ही टोला मोहल्ला में मृतक तौसीफ के घर का माहौल।
पहले रेत में और फिर गंगा में टिकटॉक वीडियो बनाने के दौरान लकी का पैर फिसला और वह पानी में गिरा तो उसे बचाने के लिए दौड़े एक-एक कर पांचों डूब गए। शुक्रवार की देर शाम वाजिदपुर स्थित कब्रिस्तान में पांचों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इसके बाद परिजनों ने रात सिसक-सिसक कर ही गुजार दी।
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वारीगढ़ही टोला मोहल्ला में मृत रिजवान के घर का माहौल।
परिजनों का कहना था कि इसी के साथ हमारी उम्मीदें भी दफन हो गईं। न जाने कैसी मनहूस घड़ी थी कि बच्चे पानी में उतरे। अब तो जिंदगी इस नासूर जख्म के साथ ही गुजारनी है। उधर, रिश्तेदार, करीबी और राजनेता आदि ढांढस बंधा रहे थे कि हम सभी आपके साथ हैं। संयम से काम लें।
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वारीगढ़ही टोला मोहल्ला में मृतक सैफ़ के घर का माहौल।
लकी के बाबा मोहम्मद रेयान खान ने कहा कि अब क्या समझना और समझाना। जब कभी ऊपर वाले मालिक से मुलाकात होगी तो पूछेंगे कि ऐसा दर्द क्यों दिया? पांचों बच्चों के परिजनों का दुख देखकर उन्हें ढांढस बंधाने वालों की हिम्मत भी जवाब दे जा रही थी।