यूपी में भदोही के एक गांव में सास-बहू की जोड़ी की बहादुरी की चर्चा हर जुबान पर है। दोनों ने काम ही कुछ ऐसा किया है कि हर कोई शिद्दत से सास-बहू के साहस को बयां करता दिखाई दे रहा है। लोग बड़े उत्साह से उनकी बहादुरी की कहानी सुनाते और दाद देते देखे जा रहे हैं। सोमवार को गांव पहुंची अमर उजाला की टीम ने ग्रामीणों से बातचीत की तो बच्चों को जलती वैन में छोड़कर भागे चालक को कोसा जा रहा था, वहीं शिद्दत से लोग सास-बहू के साहस को बयां करते दिखे। आगे की स्लाइड्स में जानें पूरा मामला...
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- फोटो : amar ujala
लखनो गांव में जयशंकर शुक्ला का सीधा-सादा परिवार है, जिसकी आजीविका मुख्य रूप से खेती-बाड़ी पर निर्भर है। शनिवार के स्कूल वैन हादसे ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। वह बताते हैं कि वैन में आग लगने के बाद उनकी पत्नी सीता देवी दौड़ीं तभी उनकी देवरानी की बहू सुमन भी यह कहते हुए दौड़ पड़ी कि ‘अरे अम्मा! हऊ देखीं गड़िया में आग लग गइल। बच्चवन जर जइहें...।’
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वैन का गेट नहीं खुल रहा था तो साहस का परिचय देते हुए सुमन ने ईंट से वैन का दरवाजा तोड़ दिया। इसके बाद किसी तरह से बच्चों को एक-एक कर निकाला गया। अमर उजाला से बातचीत में सुमन ने बताया कि आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि नजदीक जाने की हिम्मत किसी की नहीं हो रही थी।
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फिर हम दोनों ने हाथ में शॉल लपेटकर बच्चों को निकालना शुरू किया। सभी बच्चों को वैन से निकाल लिया गया। उन्होंने कहा कि उस समय बच्चों को सकुशल निकालने के अलावा और कुछ नहीं सूझ रहा था। अपनी भी परवाह नहीं थी।
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गौरतलब है कि बच्चों को बचाने में दोनों लोग झुलस गईं। सीता देवी ज्यादा घायल हुईं। गांव के रवींद्र दुबे कहते हैं कि अगर दोनों महिलाएं न होतीं तो शायद एक भी बच्चा न बचता। अशोक दुबे ने कहा कि बच्चों की मदद करने वाले परिवार को भी आर्थिक मदद दी जानी चाहिए। उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।