अद्भुत, अकल्पनीय और भव्य... दीप मालिकाओं की सुनहरी आभा से दमकते घाटों का आकर्षण आंखों के रास्ते हृदय में उतरता चला गया। दीपों की लड़ियों की ज्योतिगंगा उत्तरवाहिनी के समानांतर दोनों छोर पर प्रवाहित हो रही थी। शंखनाद, घंटा-घड़ियाल, कपूर और लोबान की सुवास के साथ ही 84 घाटों के दोनों छोर 10 लाख से अधिक दीपों से जगमग हो उठे। नमो घाट से रविदास घाट तक अनंत दीप आसमान के सितारों को भी अपनी चमक से मात दे रहे थे। ऐसा दृश्य जो न कभी देखा, न सुना और न किसी ने सुनाया।
सोमवार की शाम को पंचगंगा घाट पर जैसे ही हजारा दीप प्रज्ज्वलित हुआ, गंगा के किनारे साढ़े सात किलोमीटर का तट भी एक-एक करके जगमग हो उठा। अर्द्धचंद्राकार घाटों पर चंद्रहार की तरह दीपक झिलमिलाने लगे। पर्यटकों ने इस अलौकिक नजारे को देखा तो बस देखते ही रह गए।गंगा की लहरों पर सतरंगी इंद्रधनुष आकाश से उतर आया। घाटों पर देवलोक का साक्षात अलौकिक दृश्य मन मोह रहा था।
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काशी की देव दीपावली की छटा
- फोटो : अमर उजाला
देवाधिदेव महादेव की नगरी में गंगधार पर स्वर्ण रश्मियों की फुहार अठखेलियां कर रही थीं। दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि की ओर से अमर जवान ज्योति प्रज्ज्वलित हुई तो गंगोत्री सेवा समिति ने मां गंगा की 108 किलो अष्टधातु की प्रतिमा का पूजन किया।
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चेतसिंह घाट पर लेजर शो
- फोटो : अमर उजाला
दीपों की दपदप, विद्युत झालरों की जगमग के साथ ही गंगा पार रेती पर आतिशबाजी का नजारा और चेतसिंह घाट पर थ्री डी प्रोजेक्शन और लेजर शो के जरिए दीवारों ने भी पुराणों की गाथा सुनाई।
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शिव नगरी की छटा...
- फोटो : अमर उजाला
श्री काशी विश्वनाथ धाम का गंगा द्वार सतरंगी रोशनी से नहाया हुआ अलग ही आभा बिखेर रहा था। शहर से लेकर गांव और पंचक्रोशी का परिक्रमा पथ पर दीपों के प्रकाश से दैदीप्यमान हो उठे। कुंड, सरोवर, तालाब और मंदिरों में भी दीप जलाए गए।
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काशी की देव दीपावली की छटा
- फोटो : अमर उजाला
सात किलोमीटर के दायरे में दोनों छोरों पर सजी दीपों की लड़ियों की आभा गंगा की लहरों पर सुनहरी आभा बिखेर रही थीं। गंगा के तट से लेकर पंचक्रोशी परिक्रमा के पथ पर 21 लाख दीप सजाए गए। श्री काशी विश्वनाथ धाम की पहली देव दीपावली पर पूरे परिसर को 50 टन फूलों से सजाया गया था।