अपनी बेबाकी के लिए राजनीतिक गलियारों में चर्चित रहने वाली रायबरेली सदर से विधायक अदिति सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया है। पिछला चुनाव उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था और जीत दर्ज की थी। अदिति ने अपने प्रतिद्वंदी को करीब 90 हजार वोटों से हराया था। हालांकि पार्टी आलाकमान को समय-समय पर वो कई मुद्दों पर नसीहत देती रहीं, साथ ही केंद्र सरकार के कई फैसलों का खुलकर समर्थन किया, जिसके चलते कांग्रेस में उनका स्थान बागी नेताओं में दर्ज हुआ।
भाजपा में शामिल हुईं अदिति सिंह: कभी प्रियंका गांधी तो कभी पीएम मोदी की प्रशंसक रहीं, जानिए उनका सियासी सफर
कांग्रेस पार्टी ने भले ही जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध किया हो लेकिन अदिति सिंह ने मोदी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। इससे जम्मू-कश्मीर के लोग मुख्यधारा से जुड़ जाएंगे। एक विधायक की हैसियत से मैं इस फैसले का स्वागत करती हूं।
अदिति ने कहा कि जब बिल लाए गए तो प्रियंका गांधी को दिक्कत हुई। अब कानून (कृषि कानून) निरस्त होने के एलान के बाद भी उन्हें दिक्कत है। आखिर वह चाहती क्या हैं, उनको स्पष्ट बताना चाहिए। अदिति ने कहा कि प्रियंका इस मामले का सिर्फ राजनीतिकरण कर रही हैं। इसकी वजह ये है कि अब उनके पास मुद्दे नहीं बचे हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के पार्टी छोड़ने पर अदिति सिंह हमलावर हुईं। उन्होंने कहा कि जितिन प्रसाद और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे पढ़े-लिखे, युवा, अनुभवी और बड़े नेता पार्टी छोड़ रहे हैं, तो इस पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को आत्ममंथन करना चाहिए। यह एक ऐसा नुकसान है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।
ये बात उसी समय की है जब जितिन प्रसाद कांग्रेस के हाथ को छोड़ भागवाधारी हुए थे। अदिति ने कहा कि यूपी कांग्रेस में नेता ही कितने बचे हैं, जिन्हें प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और उनकी टीम नहीं संभाल पा रही है। यह लल्लू के लिए भी मंथन का विषय है।