{"_id":"58ae967b4f1c1b0953b25a84","slug":"shivaratri-is-tomorrow-augharnath-shiva-temple-things-unheard-of","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन से पूरी होती है मनोकामना, औघड़नाथ की अनसुनी बातें ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन से पूरी होती है मनोकामना, औघड़नाथ की अनसुनी बातें
Fri, 24 Feb 2017 12:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Fri, 24 Feb 2017 12:27 PM IST
विज्ञापन
1 of 5
औघड़नाथ शिव मन्दिर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
मेरठ में स्थित श्री औघड़नाथ शिव मन्दिर एक प्राचीन सिद्धपीठ है जहाँ प्राचीन काल से शिव की अराधना की जाती है। इस मन्दिर में शिवलिंग स्वयंभू हैं। भक्तों की मनोकामनायें पूर्ण करने वाले औघड़दानी शिवस्वरूप हैं। इसी कारण इसका नाम औघड़नाथ शिव मन्दिर पड़ा।
2 of 5
औघड़नाथ शिव मन्दिर
ब्रह्मांड में शिव व शक्ति के मिलन का महादिवस महाशिवरात्रि 24 फरवरी को स्वार्थ सिद्ध योग में शुक्रवार को मनाई जाएगी। शाम 6:30 बजे से श्रवण नक्षत्र आ जाने से त्रियोग बन रहा है। इससे त्रिनेत्री महाशिव की कृपा का यह महान दिवस महाशिवरात्रि हो गई है। इस तरह का यह विशेष योग इस सदी में पहली बार पड़ रहा है। महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा और रुद्राभिषेक सभी प्रकार के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने में समर्थ होगा।
चार प्रहर पूजा प्रारंभ करने के विशेष मुहूर्त
3 of 5
शिवलिंग पर जल चढ़ाते भक्त
भारत ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष ज्योतिष वैज्ञानिक भारत ज्ञान भूषण ने बताया कि चार प्रहर पूजा प्रारंभ करने के लिए विशेष मुहूर्त है। इसमें प्रथम प्रहर शाम 6:13 बजे से 6:20 बजे, दूसरा प्रहर रात 9:24 बजे से 9:30 बजे, तीसरा प्रहर रात 12:34 बजे से 1:39 बजे और चौथा प्रहर सुबह 3:45 बजे से 3:49 बजे तक है। प्रहर पूजन प्रारंभ से तीन घंटे के अंदर महाशिवरात्रि पूजन पूर्ण कर लेना चाहिए। तब इसके अगले प्रहर की पूजा प्रारंभ करनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
पंडित श्रीधर त्रिपाठी जी से खास बातचीत
4 of 5
पंडित श्रीधर त्रिपाठी
बाबा औघड़नाथ मंदिर के पुजारी पंडित श्रीधर त्रिपाठी ने बताया कि रुद्र के नेत्र ही रुद्राक्ष कहलाते हैं। रुद्राक्ष मानव के जीवन में सकारात्मक प्रभाव लाते है। शनि पीठ के महामंडलेश्वर महेंद्र दास जी ने बताया कि महाशिवरात्रि में केवल पांच प्रकार की पूजा से ही पंच तत्वों का संतुलन हो जाता है। शास्त्रों में पूजा के पांच प्रकार बताए गए है। अभिगमन, उपादान, योग, स्वाध्याय और इज्या। जब पंडित जी औघड़नाथ मंदिर के स्थापना दिवस के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि 1857 की क्रांति के समय से ही यह मंदिर यहां स्थित हैं। हालांकि कुछ लोग यह भी मानते है कि औघड़नाथ मंदिर प्रथम क्रांति के समय से पहले ही यहां स्थित हैं। उन्होंने बताया कि यहां देश-विदेश से भक्त आते हैं। पंडित जी ने कहा कि जो लोग यहां सच्ची श्रृद्धा से आते हैं उनकी मनोकामना पूरी होती है।
विज्ञापन
शिवलिंग पर ऐसे चढ़ाए फूलपत्र
5 of 5
औघड़नाथ मंदिर
राजराजेश्वरी मंडिर के पुजारी दिव्यानंद जी महाराज और मंदिर महादेव के पुजारी संजय त्रिपाठी ने बताया कि फूल और फल व पत्ते पेड़ों पर जिस तरह उगते है ठीक उसी तरह से दाहिने हाथ की हथेली को सीधा करके मध्यमा अनामिका और अंगूठे की सहायता से इस प्रकार चढ़ाए तकि फूल व फल क मुख ऊपर की तरफ हो।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।