जिस उम्र में बच्चे खेलते हैं उस उम्र में मेरठ की क्रांतिधरा से निकले डबल ट्रैप शूटर शार्दुल विहान ने एशियन गेम्स में रजत जीतकर देश का मान बढ़ाया है। एक दिन में निशाना लगाने में शार्दुल का हर रोज का खर्च करीब 10 हजार रुपये और माह में तीन से सवा तीन लाख रुपये है।
ये हैं शार्दुल के शौक
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शार्दुल विहान की मां और गांव में खुशी मनाते परिजन
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एनएच-58 स्थित सिवाया गांव में किसान परिवार से निकले दीपक विहान के बेटे शार्दुल विहान ने जकार्ता में चल रहे एशियन गेम्स में रजत मेडल देश के नाम कर दिया। शार्दुल ने दिल्ली के कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में अर्जुन अवार्डी अनवर सुल्तान के निर्देशन में प्रैक्टिस की। शार्दुल ने 8 लाख रुपये की प्राजी कंपनी की रायफल से निशाना लगाकर यह मेडल अपने नाम किया है। एक दिन में 250 कारतूस से निशाना लगाता था।
इंडिया नहीं पहले, दक्षिण कोरिया गया शार्दुल
मेरठ में शार्दुल विहान के स्वागत का इंतजार कर रहे लोगों को अभी 15 दिन और इंतजार करना पड़ेगा। पिता दीपक विहान ने बताया कि शार्दुल जकार्ता में मेडल जीतने के बाद शनिवार को साउथ कोरिया पहुंच जाएगा। वहां उसका 8 सितंबर को वर्ल्ड चैम्पियनिशप में मैच होना है। इसकी तैयारी के लिए वह अभी से ही वहां पहुंच गया है। इसके बाद ही वह मेरठ आएगा।
शार्दुल विहान के पिता दीपक विहान और मां मंजू देवी ने बताया कि शार्दुल को स्वीमिंग करना अच्छा लगता है। साथ ही म्यूजिक सुनना भी और साइकिलिंग करना भी अच्छा लगता है। यदि वह घर पर रहता है तो पढ़ाई के साथ साथ म्यूजिक पर भी ध्यान देता है।
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शार्दुल विहान
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शार्दुल को मम्मी के बनाए छोले भटूरे पसंद
देश के कम उम्र के शूटर शार्दुल विहान को अपनी मम्मी के हाथ के बने छोले भटूरे और बर्गर बहुत पसंद है। फोन पर सुबह बात करने के दौरान शार्दुल ने कहा कि आऊंगा तो आपके हाथ से जी भरकर खाऊंगा। शार्दुल की मां मंजू देवी ने सुबह बेटे से फोन पर बात की। बेटे ने कहा कि मां आपके हाथ का बना खाना खाने का मन है।