सीबीआई के बाद प्रवर्तन निदेशालय की ओर से तत्कालीन दो जिलाधिकारियों सहित जिले के कई अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बाद सेटिंग का जाल बिछाने में खनन माफिया जुट गए हैं। अगली स्लाइडों में जानिए पूरा अपडेट-
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यमुना नदी के बरथा घाट पर जेसीबी से किया जा रहा अवैध खनन
- फोटो : अमर उजाला
प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों की मानें तो ईडी के निशाने पर अभी भी जिले के कई अधिकारी, सफेदपोश और खनन माफिया हैं। सबसे अहम बात ये है कि प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दर्ज मुकदमे के बाद पूछताछ की जो कड़ी शुरू होगी, उसके तहत कई तत्कालीन अधिकारियों की गर्दन भी फंस सकती है। जिससे सहारनपुर जिले में उस वक्त रहे अधिकारियों में खलबली मची हुई है।
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अवैध खनन के बाद पुलिस की चेकिंग के दौरान गुजरता डंपर
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बता दें कि दो तत्कालीन जिलाधिकारियों सहित अन्य पर ईडी ने शिकंजा कसा है, लेकिन जिन क्षेत्रों में अवैध खनन खुलेआम हुआ है। उस क्षेत्र के एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार सहित पुलिस के कुछ अफसर, कोतवाल, थानेदार भी शिकंजे में आ सकते हैं।
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ये है बरसाती नदी
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सूत्र बताते हैं कि ईडी के पास एक अहम डायरी है, जिसमें कई लोगों के अवैध खनन से किसी न किसी रूप में जुड़े होने के पुख्ता सबूत हैं। शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी सहारनपुर जनपद के बेहट से लेकर हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज की सीमा तक अंधाधुंध अवैध खनन किया गया। उस वक्त की सरकार का कृपा पात्र होने की वजह से माफिया ने सारे नियम-कानून ताक पर रख दिए और एक पट्टों की आड़ में कई-कई बीघे नदियों का अवैध खनन कर डाला।
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सीबीआई ने छापेमारी की थी
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सूत्र यह भी बताते हैं कि दो-चार फुट तक नहीं बीस-बीस फुट गहरी खोदाई कर खनन सामग्री निकाली गई और बेखौफ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा तक पहुंचाई गई। योगी सरकार को जब पुख्ता प्रमाण मिला तो केन्द्र की अनुमति के बाद सीबीआई ने सहारनपुर में खनन के खिलाड़ियों के यहां छापा मारकर कई दस्तावेज जुटाए। इसी आधार पर ईडी ने अब शिकंजा कसा है। जिसके बाद खनन माफिया दहशत में हैं।