वृंदावन के ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर के प्रांगण में सोमवार को बड़ी संख्या में विधवा माताओं ने एक बार फिर होली मनाई। सुलभ इंटरनेशनल द्वारा हाल के वर्षों में आयोजित विधवाओं के लिए वृंदावन की होली का उत्सव उन सैकड़ों विधवाओं के लिए यादगार अवसर बन गया है, जिन्हें कुछ समय पहले तक अपमान का सामना करना पड़ता था।
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गोपीनाथ मंदिर में होली।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुलभ इंटरनेशनल की कार्यकारी संयोजक नित्या पाठक ने बताया पांच आश्रमों में रहने वाली बड़ी संख्या में माताओं ने रंगों के इस त्योहार में सक्रिय रूप से भाग लिया। विधवा माताएं प्राचीन राधा गोपीनाथ मंदिर में एकत्रित हुईं और एक-दूसरे पर सूखे रंग और फूल फेंककर होली खेली। उन्होंने मंत्रोच्चार किया और नृत्य करते हुए रंग से होली खेली।
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गोपीनाथ मंदिर में होली।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उत्सव के लिए 1000 किलोग्राम से अधिक फूल और 700 किलोग्राम गुलाल (सूखे रंग) की व्यवस्था की गई थी। नित्या पाठक ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में विधवाओं ने बदलाव को अपनाया है और होली और दिवाली जैसे त्योहारों में भाग लेने के लिए आगे आई हैं। कुछ समय पहले तक यह अकल्पनीय था।
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विधवा माताओं ने खेली होली।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में समाज सुधारक और सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक स्वर्गीय डॉ. बिंदेश्वर पाठक ने वृंदावन में बसी हजारों विधवाओं को होली मनाने के लिए एकजुट करने के प्रयास शुरू किए थे।
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विधवा माताओं ने खेली होली।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
होली जैसे त्योहारों में भाग लेने से उनका मनोबल बढ़ता है और वे आशा और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ती हैं।