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'आपको तो यशोदा से प्यार था.?', फिर कुछ इस अंदाज में दिया था गोपाल दास नीरज ने जवाब

Sat, 21 Jul 2018 11:57 AM IST
प्रशांत कुमार द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
प्रशांत कुमार द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 21 Jul 2018 11:57 AM IST
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tribute to gopaldas neeraj
दिवंगत गोपाल दास नीरज

‘अमर उजाला’ ने प्रेमी गीतों के सरताज कवि गोपाल दास नीरज से वेलेंटाइन डे पर कोई संदेश देने की बात कही तो वह कानपुर का नाम सुन चहक उठे थे। वह अपनी पुरानी यादों में खो गए थे। फिर तो अपने प्यार के आगाज से अंजाम तक के राज खोलते चले गए थे। अपने पहले प्यार, बिछोह, मुफलिसी, गम और न जाने क्या-क्या। इस ‘प्रेम पुजारी’ ने कई प्रेम गीत लिखे जिन्हें पढ़-सुनकर न जाने कितनों ने प्रेम करना सीखा। उनके गीतों के जरिए आज भी कितने ही प्रेमी प्रेम का इजहार करते हैं। तब टेलीफोन पर हुई उनसे बातचीत के प्रमुख अंश-



क्या प्यार ने आपको इतना बड़ा कवि बना दिया?
हां, मैंने व्यक्तिगत प्रेम को विश्व प्रेम में परिवर्तित किया है। प्रेम जब शरीर में रहता है, वासना है, मन में रहता है तो तो प्रेम और जब इन दोनों से उठ जाता है तो भक्ति में परिवर्तित हो जाता है। तब शरीर की आवश्यकता ही नहीं रह जाती।

-क्या आपने कभी प्यार किया है, किससे?
-छोड़ो भी जाने दो यार...।



आगे की स्लाइड में - आपको तो यशोदा से प्यार था...?

tribute to gopaldas neeraj
दिवंगत गोपाल दास नीरज

क्या आपने उपन्यासकार कुंदन से प्यार किया पर शायद आपकी उनसे जोड़ी नहीं बन पाई?
(यह नाम सुनते ही तब 88 साल के नीरज चहक कर बोले थे) हां, सही है। तुम्हें कैसे मालूम? पागल हो गया था मैं..12 साल तक टूटकर प्यार किया उसे, फिर न जाने कहां चली गई? हर रोज उसकी राह तकता-तकता पगला गया था।

..मेर घर कोई खुशी आती तो कैसे आती, उम्र भर साथ रहा दर्द महाजन की तरह...

आपको तो यशोदा से प्यार था?
हां, वो लड़कपन था। वह बहुत पैसे वाली थी और मैं मुफलिस...मैं पीड़ा का राज कुंवर हूं, तुम शहजादी स्वरूप नगर की, हो भी गया प्यार हमसे तो मिलन कहां होगा? क्या कर सकता था। उसे कभी भूल नहीं पाया। उरई में मिल गई थी सालों बाद, कटे-फटे  कपड़ों में लिपटी, परेशान, इतना दुख हुआ कि कई दिन सो न सका।
कैसा भी हो मौसम, कैसी चले बयार
बड़ा कठिन है भूलना पहला-पहला प्यार
हंसी जिसने खोजी, चमन लेके लौटा
खुशी जिसने खोजी धन लेके लौटा
प्यार खोजने चला जो, वो न तन लेके लौटा न मन लेकेलौटा



आगे की स्लाइड में- और कानपुर की चांद कुमारी...?

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दिवंगत गोपाल दास नीरज

और कानपुर की चांद कुमारी
गरीबी के दौर में बहुत मदद की थी उन्होंने। उनको एक किताब समर्पित की थी, उनका एक फोटो छाप दिया था। बस, उनके साथ मेरा नाम जोड़ दिया गया बेवजह। वह तो मेरी मां के समान थीं।

आपके गीतों में आपका प्यार झलकता है, क्या आपने अपने कई गीत अपने प्यार को समर्पित किए हैं?
हां..हूं..यह कह सकते हो।

शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब, उसमें फिर मिलाई जाए थोड़ी सी शराब, होगा यूं नशा जो तैयार, वो पर है...। आपके इस गीत में प्यार का यह कैसा फार्मूला?
शोखिया यानी चांदनी की चंचलता, फूलों की खुशबू और फिर थोड़ा नशा (सुरुर) बस, यही है प्यार।

आगे की स्लाइड में - आपकी नजर में प्रेम की परिभाषा क्या है..?

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tribute to gopaldas neeraj
दिवंगत गोपाल दास नीरज
आपकी नजर में प्रेम की परिभाषा क्या है?
तुम डरो न प्यार करो
प्रेम तो सदा ही पवित्र है
प्रेम है वासना बंधी पड़ी
प्रेम है कि आंख पे शर्म जड़ी
प्रेम ही सभ्यता बढ़ी खड़ी
प्रेम बिना मनुष्य दुश्चरित्र है
प्यार को संबल बनाओ, जीने का
आधार बनाओ,  न मिल पाने पर बदले
की भावना को त्यागकर अपने प्यार को
एक नया आकार और आयाम दो।
इतने बदनाम हुए हम तो इस जमाने में
लगेंगी आपको सदियां हमें भुलाने में
कानपुर आह, आज याद तेरी आई
फिर श्याह कुछ और मेरी रात हुई
जाती है, आंख पहले भी यह रोई थी
बहुत तेरे लिए, अब तो लगता है कि
बरसात हुई जाती है।
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