राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वकीलों को दी हैं कुछ ये नसीहतें
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बार-बार हड़ताल भी आम हो गई है। इससे माहौल बिगड़ता है। लोगों को समय से न्याय मिले, निर्णय की भाषा समझ में आए, न्याय पाने में खर्च कम हो, ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है। राष्ट्रपति बार एसोसिएशन के ऑडीटोरियम के शिलान्यास कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्हाेंने ऑडीटोरियम का शिलान्यास किया।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- गरीब न्यायालय की चौखट पर जाने से बचता है...
शुक्रवार को सिविल लाइंस स्थित रागेंद्र स्वरूप ऑडीटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कहा कि गरीब आदमी न्यायालय की चौखट पर जाने से बचता है, यह स्थिति ठीक नहीं है। इसे ठीक करना अधिवक्ताओं का काम है। उन्होंने वकीलों की बार-बार होने वाली हड़ताल पर भी असहमति जाहिर की। कहा, पिछले कुछ दिनों में हड़ताल की घटनाएं बढ़ी हैं, इससे न्याय प्रक्रिया बाधित होती है।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- ताकि न्यायिक व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बना रहे...
यह भी कहा कि कभी-कभी ऐसा भी सुनने में आता है कि दोनों पक्षों के वकील आपस में मिल जाते हैं और वादकारी की समय से न्याय पाने की उम्मीद खत्म हो जाती है। इन सभी स्थितियों से हमें बचना होगा, जिससे न्यायिक व्यवस्था पर लोगों को अटूट विश्वास हमेशा बना रहे। यह काम अधिवक्ताओं के जरिये ही हो सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश को मार्गदर्शन अधिवक्ता समुदाय से ही मिला है। न्याय दिलाने के लिए मुकदमा लड़ा जाए, फायदे के लिए नहीं। राष्ट्रपति ने वैकल्पिक न्याय प्रणाली बनाने पर जोर दिया।