कानपुर की ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री (ओपीएफ) ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश के सबसे अत्याधुनिक और ताकतवर फाइटर प्लेन सुखोई एसयू-30 एमकेआई के पायलटों के इस्तेमाल में आने वाले पैराशूट अब निर्माणी में बनाए जाएंगे। इसके लिए डीआरडीओ ने निर्माणी को प्रौद्योगिकी संबंधी स्थानांतरण (टोओटी) दस्तावेज सौंप दिए हैं। साथ ही भारी मात्रा में उत्पादन करने पर भी सहमति बन गई है।
ये ट्विनजेट मल्टीरोल फाइटर प्लेन है जिसे रूस के विमान निर्माता सुखोई ने विकसित किया है। भारतीय सेना के लिए इसे लाइसेंस के तहत हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) बनाता है। अभी तक वायुसेना इन पैराशूटों को आयात करती थी।
टीओटी मिलने के बाद ओपीएफ में इसके दो प्रोटोटाइप तैयार होंगे। इसे इसी वित्तीय वर्ष में तैयार करने का लक्ष्य है। इसके बाद इसे परीक्षण के लिए डीआरडीओ को दिया जाएगा।
सीट के नीचे लगता है पैराशूट
सुखोई फाइटर प्लेन दो पायलट उड़ाते हैं। दोनों की सीट के नीचे यह पैराशूट लगा होता है। किसी आपातकाल की स्थिति में खुद को बचाने के लिए पायलट इसका इस्तेमाल करते हैं। एक पैनिक बटन दबाते ही यह खुल जाता है।
23 अक्तूबर को दिल्ली में हुए समारोह में टीओटी हस्तांतरण पर समझौता किया गया है। यह मेक इन इंडिया के तहत एक बड़ी उपलब्धि है। इससे पहले निर्माणी में फाइटर प्लेन तेजस, और पायलट रहित लक्ष्य विमान के पैराशूट बनाए जा रहे हैं।
-जीसी राउत, महाप्रबंधक, ओपीएफ।