केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार ने राज्यसभा में भले ही बता दिया हो कि कोरोना की लहर में ऑक्सीजन की किल्लत से किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन हकीकत इसके उलट है। दूसरी लहर की तबाही में कई रोगियों को ऑक्सीजन की किल्लत की वजह से भर्ती नहीं किया गया। मरीजों ने अस्पताल की दहलीज पर दम तोड़ दिया था। एंबुलेंस रोगियों को लातीं और फिर छोड़कर भाग जातीं। दूसरे अस्पतालों में ऑक्सीजन न मिलने पर 30 रोगी निजी एंबुलेंस से हैलट लाए गए, हालांकि उनकी रास्ते में ही मौत हो गई। हैलट इमरजेंसी में तो रोगियों से कहा जाता था कि ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर आएं। जिन 30 रोगियों ने अस्पताल आने के बाद दम तोड़ा, उनकी गिनती कोरोना से हुई मौतों में तो है, लेकिन अस्पताल के पास सही नाम-पते का ब्यौरा नहीं है। परिजन रोते-बिलखते लौट गए कि ऑक्सीजन मिल जाती तो जान बच जाती। उस वक्त हैलट इमरजेंसी के बेड पर डबलिंग और ट्रिपलिंग हो रही थी और एक सिलिंडर से रोगियों में शेयरिंग चल रही थी।
तस्वीरों में छिपा मौत का सच: कानपुर के अस्पतालों में नहीं मिली थी ऑक्सीजन, सैकड़ों ने तोड़ा था दम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 22 Jul 2021 05:31 AM IST
सार
दूसरी लहर की तबाही में कई रोगियों को ऑक्सीजन की किल्लत की वजह से भर्ती नहीं किया गया। मरीजों ने अस्पताल की दहलीज पर दम तोड़ दिया था।
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