मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, दान और हरि गुणगान का विशेष महत्व होता है। इस बार इस पर्व को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। विद्वानों का कहना है कि 14 जनवरी की शाम 7:53 बजे सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। चूंकि हिंदू सनातन संस्कृति में उदया तिथि के त्योहारों को ही मनाने की परंपरा रही है।
ऐसे में 15 जनवरी को उदया तिथि में स्नान, दान और प्रभु का गुणगान लाभकारी रहेगा। इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक मकर संक्रांति रहेगी। हालांकि मकर संक्रांति का पर्व 14 और 15 जनवरी की दोनों ही तिथियों में मान्य बताया जा रहा है।
पंडित केए दुबे पद्मेश का कहना है कि 14 जनवरी की शाम 7:53 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ खरमास खत्म हो जाएंगे और मांगलिक कार्यक्रमों की शुरूआत हो जाएगी। उदया तिथि के अनुसार 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो उत्तरायण हो जाते हैं।
इसी के साथ ही शिशिर ऋतु शुरू हो जाती है। पंडित विधुशेखर पांडेय का कहना है कि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही मकर संक्रांति शुरू हो जाती है। कुंभ में शाही स्नान 14 जनवरी को है। इस लिहाज से मकर संक्रांति 14 व 15 जनवरी को मनाई जाएगी।
स्नान और दान का महत्व
मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान और दान पुण्य का बड़ा महत्व है। हालांकि इस बार सरसैया घाट में श्रद्धालुओं को गंगा स्नान के लिए उस पार जाना होगा। कारण है कि घाट पर अभी साफ पानी नहीं है।
इस कारण घाट पर स्नान संभव नहीं है।