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बालू चबाने के लिए क्याें मजबूर हैं यहां के लाेग
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 05 Jan 2018 08:43 PM IST
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अवैध खनन के विराेध में चबाई बालू
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यूपी के महाेबा जिले में लाेग बालू चबाने के लिये मजबूर हाे गये हैं। एेसा करने के पीछे कारण हैं यहां पर बेराेक टाेक हाे रहा अवैध खनन। महाेबा में पहाड़ाे काे एेसे ताेड़ा जा रहे है जैसे बच्चे गेंद तड़ी में गिट्टी ताेड़ते हैं। अवैध खनन के विराेध में आंदोलनकारियाें ने बालू चबा कर आमरण अनशन शुरू किया है।
डेमो पिक
चित्रकूटधाम मंडल में अवैध खनन के विरुद्ध यहां मंडल मुख्यालय में कड़ाके की ठंड और कोहरे में बैठे आंदोलनकारियों की सुनवाई नहीं हो रही। उनमें गुस्सा पनप रहा है। शुक्रवार को पांचवें दिन धरनास्थल पर आंदोलनकारियों ने बालू चबा कर विरोध जताया। शनिवार को धरने को आमरण अनशन में बदलने की घोषणा की है।
डेमो पिक
स्वतंत्रता स्मारक अशोक लाट में बांदा समेत हमीरपुर और महोबा आदि के समाजसेवी और किसान अवैध खनन के विरुद्ध धरना-आंदोलन चला रहे हैं। अवैध खनन के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले हमीरपुर के अधिवक्ता विजय द्विवेदी अगुवाकार हैं।
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डेमो पिक
चारों जनपदों में खदानों और पहाड़ों में अवैध खनन का मुद्दा आंदोलन में शामिल है। शुक्रवार को आंदोलनकारियों ने धरनास्थल पर बालू चबा कर विरोध जताया। कहा कि बुंदेलखंड के किसानों के पास कुछ नहीं बचा है। फसलें अवैध खनन से बर्बाद हो गईं हैं। लिहाजा बालू चबा कर पेट भर रहे हैं।
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बालू खाते अांदाेलनकारी
विजय द्विवेदी ने कहा कि जसपुरा क्षेत्र में अवैध खनन हो रहा है। वहां के किसान धरने पर बैठे हैं। प्रशासन चुप्पी साधे है। श्री द्विवेदी और शिवसेना महंत रतन ब्रह्मचारी तथा प्रवास सोसाइटी के आशीष सागर ने बताया कि छह जनवरी से धरना आमरण अनशन में तब्दील हो जाएगा।