हमारे देश में भूत-प्रेत, डायन, चुड़ैल, आत्मा, खजाना जैसी चर्चाओं के बाजार हमेशा गर्म ही रहते हैं। चर्चाएं कितनी सच्ची होती हैं और कितनी झूठी इसे साबित कर पाना बड़ा ही मुश्किल है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐतिसाहिक कानपुर शहर के ऐसे ही 5 अनसुलझे रहस्य और जगहों के बारे में जिन्हें जानकर लोग आज भी डर जाते हैं।
इन 5 रहस्मय स्थानों पर जाने से आज भी डरते हैं लोग
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1. अनवरगंज का बंगला नंबर 128
अनवरगंज के प्राइमरी स्कूल का बंगला नंबर 128 कमरा जहां जाने से बच्चे डरते हैं। तीन साल के अंदर स्कूल के बच्चों की संख्या इतनी कम हो गई कि टीचरों का ट्रांसफर करना पड़ा। नौबत तो ये है कि यहां अब दिन में उंगलियों में गिनने वाली संख्या में बच्चे आते हैं रात होते ही यहां सन्नाटा पसर जाता है। स्कूल की टीचर रजनी गुप्ता का कहना है कि कुछ साल पहले स्कूल के एक कर्मचारी की पत्नी ने क्लास रूम में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसे बाद स्कूल के कुछ बच्चे बीमार पढ़ गए। साथ ही स्कूल के अंदर ही एक छात्र की मौत भी हो गई थी। फिर ऐसी अफवाह फैली की महिला की आत्मा स्कूल के कमरे में रहती है और इसी के चलते अभिवावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया। पियून रमेश ने कहना है कि कुछ बच्चों ने किसी औरत को कुर्सी पर बैठे हुए भी देखा है।
2. गंगा बैराज में डायन
कानपुर के नवागंज में बने गंगा बैराज में एक डायन का वीडियो बनाने का दावा सोशल मीडिया पर किया गया है। सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने इस वीडियो को देखा और शेयर भी किया है। वीडियो बनाने वाले ने लिखा है कि गंगा बैराज में रात 2 बजते ही आत्माओं का जमावड़ा लग जाता है। वहां रात में कोई भी जाता है तो डर के ही वापस लौटता है। आसपास रहने वालों ने भी ये अनुभव किया है कि कोई अदृश्य शक्ति उन्हें परेशान करती है।
गंगा नदी बांध के पास वास्तविक डायन ..29 जनवरी कानपुर
https://www.youtube.com/watch?v=8rspF-vKDtg
3. सिविल लाइंस ग्रेव यार्ड
4. खेरेश्वरधाम मन्दिर में अश्वत्थामा की आत्मा
खेरेश्वरधाम मन्दिर कानपुर से 40 किलोमीटर दूर शिवराजपुर में गंगा नदी से लगभग 2 किलोमीटर दूर स्थित है। महाभारत काल से सम्बन्धित इस मन्दिर के शिवलिंग पर केवल गंगा जल ही चढ़ता है। मान्यता है कि मन्दिर को गुरु द्रोणाचार्य जी द्वारा बनवाया गया था और यहीं उनके पुत्र अश्वत्थामा का जन्म भी हुआ था। कहते हैं कि मन्दिर में रोजाना रात्रि में 12 से 1 बजे के बीच द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा पूजा करने के लिए आते हैं। मन्दिर के पुजारी गोस्वामी के अनुसार रात्रि में मन्दिर बंद होने के बाद जब सुबह 4 बजे मन्दिर के पट खुलते हैं तो यहां स्थित मुख्य शिवलिंग पर जो सफेद फूल रखे जाते हैं, उनमें से एक फूल का रंग बदल कर लाल हो जाता है।