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पिता-पुत्र की एक साथ उठी अर्थी, मचा कोहराम
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 08 Jul 2017 08:27 PM IST
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सड़क हादसे में बाप-बेटे की एकसाथ मौत
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में खेत की जुताई कर घर लौटते समय शुक्रवार की रात एक परिवार पर कहर बनकर टूटी।
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पिता और भाई की मौत पर गमगीन जयप्रकाश की बेटी अंबिका
- फोटो : अमर उजाला
ट्रैक्टर पलटने से हादसे में मरने वालों की संख्या दो हो गई है। ट्रैक्टर में दबकर 13 वर्षीय मासूम की घटनास्थल पर मौत हो गई थी। वहीं उसके पिता ने झांसी अस्तपाल जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। किसान की पत्नी और ट्रैक्टर चालक को मामूली चोटें आईं थी। मझगवां के गिरवर गांव निवासी जयप्रकाश लोधी (35) पुत्र शिवचरन खेत जोतने के लिए गांव के रामसिंह लोधी का ट्रैक्टर भाडे़ पर लेकर गया था। ट्रैक्टर गांव का बौरा चला रहा था। खेत की जुताई के बाद शुक्रवार की शाम करीब सात बजे जयप्रकाश अपनी पत्नी संतोषी के साथ घर लौट रहा था।
दो मौतों से टूटा पहाड़, बिलखते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
गांव के नजदीक पहुंचने पर उसका 13 वर्षीय पुत्र अंकुश रास्ते में मिल गया तो वह भी ट्रैक्टर पर बैठ गया। कुछ दूर चलने के बाद ट्रैक्टर चालक ने स्पीड बढ़ा दी और मोड़ पर ट्रैक्टर से नियंत्रण खो बैठा। ट्रैक्टर मिट्टी में फिसलते हुए सड़क किनारे गहरे गड्ढे में पलट गया। हादसे में ट्रैक्टर पर सवार अंकुश की मौके पर ही मौत हो गई थी।
जबकि जयप्रकाश गंभीर रूप से घायल हो गया था। किसान की पत्नी संतोषी और चालक बौरा को मामूली चोटें आईं थी। ग्रामीण आननफानन जयप्रकाश को अस्पताल ले गए। जहां से चिकित्सकों ने उसे झांसी रेफर कर दिया। रात करीब 11 बजे बरूआ सागर के पास जयप्रकाश ने दम तोड़ दिया। बाप-बेटे की मौत से पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है।
जबकि जयप्रकाश गंभीर रूप से घायल हो गया था। किसान की पत्नी संतोषी और चालक बौरा को मामूली चोटें आईं थी। ग्रामीण आननफानन जयप्रकाश को अस्पताल ले गए। जहां से चिकित्सकों ने उसे झांसी रेफर कर दिया। रात करीब 11 बजे बरूआ सागर के पास जयप्रकाश ने दम तोड़ दिया। बाप-बेटे की मौत से पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है।
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सड़क किनारे पलटे ट्रैक्टर को देखते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
शनिवार की सुबह पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराया। मृतक के भाई मंशाराम ने ट्रैक्टर चालक पर लापरवाही से ट्रैक्टर चलाने का आरोप लगाया है। भाई का कहना है कि यदि चालक बौरा लापरवाही से ट्रैक्टर न चलाता तो शायद यह हादसा न होता। उन्होंने बताया चालक अच्छी तरह से ट्रैक्टर चलाना नहीं जानता था। मझगवां एसओ ने बताया कि अभी उनके पास तहरीर नहीं आई है।
ननिहाल में जयप्रकाश करता था खेतीबाड़ी
जरिया थाने के पहरा गांव निवासी शिवचरन लोधी के चार पुत्र मंशाराम, जगदेव, जयप्रकाश और रामकुमार हैं। शिवचरन को उसके ननिहाल गिरवर में 35 बीघा जमीन मिली थी। मंशाराम और रामकुमार पहरा में व जयप्रकाश और जगदेव गिरवर गांव में अपने परिवार के साथ रहते थे। गिरवर गांव में जयप्रकाश के हिस्से में करीब नौ बीघा जमीन थी। जिस पर खेती कर अपने परिवार का गुजर बसर कर रहा था। जयप्रकाश के ऊपर एसबीआई बसेला बैंक का करीब 60 हजार रुपये का कर्ज था।
ननिहाल में जयप्रकाश करता था खेतीबाड़ी
जरिया थाने के पहरा गांव निवासी शिवचरन लोधी के चार पुत्र मंशाराम, जगदेव, जयप्रकाश और रामकुमार हैं। शिवचरन को उसके ननिहाल गिरवर में 35 बीघा जमीन मिली थी। मंशाराम और रामकुमार पहरा में व जयप्रकाश और जगदेव गिरवर गांव में अपने परिवार के साथ रहते थे। गिरवर गांव में जयप्रकाश के हिस्से में करीब नौ बीघा जमीन थी। जिस पर खेती कर अपने परिवार का गुजर बसर कर रहा था। जयप्रकाश के ऊपर एसबीआई बसेला बैंक का करीब 60 हजार रुपये का कर्ज था।
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घटना की जानकारी देता जयप्रकाश का भाई मंशाराम।
- फोटो : अमर उजाला
टूटा गमों का पहाड़
हादसे में मासूम बेटे और पति की मौत से पत्नी संतोषी के ऊपर मानो गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। अचानक आए इस गम के पहाड़ से संतोषी रह रहकर बेहोश हो जाती है। उसका रो रोकर बुरा हाल है। जयप्रकाश की सबसे बड़ी बेटी 14 वर्षीया अंबिका अपने कठोर गांव निवासी मामा के यहां रहकर आठवीं कक्षा में पढ़ रही है। जबकि बेटा अंकुश गांव के प्राइमरी स्कूल में कक्षा चार में पढ़ रहा था। अंकुश इकलौता बेटा था। इस हादसे के गांव के अधिकांश घरों के चूल्हे तक नहीं जले।
हादसे में मासूम बेटे और पति की मौत से पत्नी संतोषी के ऊपर मानो गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। अचानक आए इस गम के पहाड़ से संतोषी रह रहकर बेहोश हो जाती है। उसका रो रोकर बुरा हाल है। जयप्रकाश की सबसे बड़ी बेटी 14 वर्षीया अंबिका अपने कठोर गांव निवासी मामा के यहां रहकर आठवीं कक्षा में पढ़ रही है। जबकि बेटा अंकुश गांव के प्राइमरी स्कूल में कक्षा चार में पढ़ रहा था। अंकुश इकलौता बेटा था। इस हादसे के गांव के अधिकांश घरों के चूल्हे तक नहीं जले।