उत्तर प्रदेश के घाटमपुर में उफनाई यमुना का जलस्तर शनिवार को ठहर गया। लेकिन अभी भी खतरे के निशान से लगभग साढ़े चार मीटर ऊपर बह रही है। वहीं, बाढ़ की चपेट में आए गड़ाथा समेत 13 गांवों में दुश्वारियां अभी कम नहीं हुई हैं। गांवों में चारों ओर पानी भरा है।
घरों की छतों में डेरा डाले ग्रामीण शनिवार को चौथे दिन भी सुरक्षित स्थानों की ओर जाते दिखे। गड़ाथा गांव में अभी भी तमाम घर पानी से घिरे हैं। लोग नाव के सहारे ही आ जा रहे हैं। विधायक सरोज कुरील और कुछ अन्य लोगों ने बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री वितरित की।
शुक्रवार को दिन में यमुना का जलस्तर 107.410 मीटर पर था। रात से जलस्तर बढ़ना थमा है। जलस्तर ठहरने के बावजूद बाढ़ ग्रस्त गांवों में दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। छतों पर ग्रामीण शरण लिए हुए हैं। गांवों से लोग अभी भी सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं।
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बाढ़ में डूबा मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
यमुना तटवर्ती गड़ाथा, लहुरीमऊ, रामपुर, मोहंटा, हरदौली, महुआपुरवा, मऊनखत, अमिरतेपुर, कटरी, काटर, बीरबल अकबरपुर, कोटरा समेत 13 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। गड़ाथा गांव के हालात ज्यादा खराब हैं। यहां चार दिनों से निरंतर बाढ़ के हालात जस के तस बने हैं। छतों पर रुके लोग नाव के सहारे ही आते जाते हैं।
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बाढ़ के पानी से घिरा घर
- फोटो : अमर उजाला
ग्रामीण मोहित, मथुरा सिंह, अशोक, किशोरी लाल, रामसिंह, प्रभुदयाल आदि ने बताया कि शुक्रवार की रात से पानी बढ़ने की गति धीमी हुई है। वहीं, एसडीएम अमित ओमर ने बताया कि जलस्तर की निगरानी के लिए राजस्व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सुरक्षा के तौर पर मोटर बोट के साथ पीएसी के जवान व पुलिस बल तैनात है।
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बाढ़ के पानी से घिरा घर
- फोटो : अमर उजाला
विधायक ने गांवों का किया दौरा, राहत सामग्री बांटी
विधायक सरोज कुरील शनिवार को बाढ़ ग्रस्त गांवों का जायजा लेने पहुंची। नाव में बैठकर बाढ़ प्रभावित गांव गड़ाथा, कटरी और महुआपुर का निरीक्षण किया। अधिकारियों को ग्रामीणों को सुविधाएं मुहैया कराए जाने के निर्देश दिए। साथ ही गांव में फंसे ग्रामीणों को राहत सामग्री भी बांटी।
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बाढ़ के बीच राहत कार्य में जुटी टीम
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि कहीं घर पानी में डूबे हैं तो कहीं पूरा गांव पानी से घिरा है। ऐसे संकट के समय में हमें मिलकर लोगों की मदद करनी चाहिए। इस दौरान कई ग्रामीणों ने विधायक से शिकायत करते हुए बताया कि गांव के अंदर अधिकारी नहीं आ रहे हैं। छतों पर शरण लेने वाले लोगों के लिए भोजन व दवाएं नहीं पहुंचाई जा रही हैं।