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गोरखपुर में बदला मौसम का मिजाज, खेतों में बरसा ‘अमृत’, शनिवार को बंद रहेंगे स्कूल
Fri, 13 Dec 2019 09:52 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Fri, 13 Dec 2019 09:52 PM IST
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रुक-रुककर पूरे दिन होती रही बारिश
- फोटो : अमर उजाला
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ठंड की पहली बारिश खेतों में अमृत बनकर बरसी। सुबह से शाम तक करीब 21 मिलीमीटर बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे। वहीं ठंड के मौसम में बृहस्पतिवार आधी रात के बाद से रुक-रुककर हो रही बारिश ने तापमान और नीचे ला दिया। दिन का तापमान सामान्य से करीब आठ डिग्री कम दर्ज किया गया। शनिवार को भी हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं।
ये तस्वीरें देवरिया बाइपास गोरखपुर की हैं।
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार को जम्मू-कश्मीर के ऊपर बना पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पहाड़ों पर जमकर बर्फबारी हुई। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के अलावा यूपी के कई जिलों समेत गोरखपुर एवं आसपास के इलाकों में खूब बारिश हुई। बृहस्पतिवार आधी रात के बाद से शुरू हुई बारिश शुक्रवार देर शाम तक रुक-रुककर होती रही। न्यूनतम तापमान तो सामान्य से ज्यादा रहा, लेकिन अधिकतम तापमान सामान्य (25 डिग्री) से करीब आठ डिग्री लुढ़ककर 17.4 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं पूरे दिन बारिश ने किसानों को काफी राहत दी। बारिश रबी की फसल के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी।
ये तस्वीरें देवरिया बाइपास गोरखपुर की हैं।
- फोटो : अमर उजाला
ड्रिप एरिगेशन की तरह हुई बारिश, फसल के लिए फायदेमंद
रबी की फसल में बुआई के 22 दिन बाद पहली सिंचाई की आवश्यकता होती है। गोरखपुर एवं आसपास के इलाकों में समय से बुआई होने की वजह से 90 प्रतिशत से ज्यादा किसानों के लिए यह बारिश काफी फायदेमंद साबित हुई है। यह बारिश बिलकुल ड्रिप एरिगेशन (टपक सिंचाई) की तरह हुई है। यह जमीन में काफी अंदर तक पहुंची है। इसके अलावा आने वाले दिनों में तापमान कम रहेगा।
मिट्टी में काफी समय तक नमी बनी रहेगी। इससे दूसरी सिंचाई करते वक्त लागत भी कम आएगी। किसानों को तीन चार दिन के बाद खेतों में यूरिया का छिड़काव करना चाहिए। फोलियर विधि से यूरिया का छिड़काव काफी फायदेमंद रहेगा। इस विधि में यूरिया को पानी में घोलकर छिड़काव करना होता है। जहां सामान्य तरीके से एक क्विंटल यूरिया लगता है, वहीं फोलियर विधि से मात्र 50 किलो यूरिया लगेगा।
- डॉ. अजय सिंह, कृषि वैज्ञानिक
रबी की फसल में बुआई के 22 दिन बाद पहली सिंचाई की आवश्यकता होती है। गोरखपुर एवं आसपास के इलाकों में समय से बुआई होने की वजह से 90 प्रतिशत से ज्यादा किसानों के लिए यह बारिश काफी फायदेमंद साबित हुई है। यह बारिश बिलकुल ड्रिप एरिगेशन (टपक सिंचाई) की तरह हुई है। यह जमीन में काफी अंदर तक पहुंची है। इसके अलावा आने वाले दिनों में तापमान कम रहेगा।
मिट्टी में काफी समय तक नमी बनी रहेगी। इससे दूसरी सिंचाई करते वक्त लागत भी कम आएगी। किसानों को तीन चार दिन के बाद खेतों में यूरिया का छिड़काव करना चाहिए। फोलियर विधि से यूरिया का छिड़काव काफी फायदेमंद रहेगा। इस विधि में यूरिया को पानी में घोलकर छिड़काव करना होता है। जहां सामान्य तरीके से एक क्विंटल यूरिया लगता है, वहीं फोलियर विधि से मात्र 50 किलो यूरिया लगेगा।
- डॉ. अजय सिंह, कृषि वैज्ञानिक
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ये तस्वीरें देवरिया बाइपास गोरखपुर की हैं
- फोटो : अमर उजाला
दिन और रात के तापमान में रहा मात्र 1.6 डिग्री का अंतर
लगातार बारिश की वजह से शुक्रवार को दिन का तापमान काफी ज्यादा गिर गया। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में मात्र 1.6 डिग्री का ही अंतर रह गया। जहां न्यूनतम तापमान 15.8 डिग्री रहा, वहीं अधिकतम तापमान 17.4 डिग्री से ज्यादा नहीं बढ़ सका। अधिकतम तापमान सामान्य से आठ डिग्री कम रहा। इसवजह से पूरे दिन कंपकंपी छूटती रही। अधिकांश लोग घर में ही दुबके रहे।
मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि अगर अधिकतम तापमान डेढ़ डिग्री और कम हो जाता तो शुक्रवार को कोल्ड डे माना जाता। शनिवार सुबह 10 बजे के बाद मौसम साफ होने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में घना कोहरा होगा। साथ ही न्यूनतम तापमान में गिरावट आएगी।
लगातार बारिश की वजह से शुक्रवार को दिन का तापमान काफी ज्यादा गिर गया। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में मात्र 1.6 डिग्री का ही अंतर रह गया। जहां न्यूनतम तापमान 15.8 डिग्री रहा, वहीं अधिकतम तापमान 17.4 डिग्री से ज्यादा नहीं बढ़ सका। अधिकतम तापमान सामान्य से आठ डिग्री कम रहा। इसवजह से पूरे दिन कंपकंपी छूटती रही। अधिकांश लोग घर में ही दुबके रहे।
मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि अगर अधिकतम तापमान डेढ़ डिग्री और कम हो जाता तो शुक्रवार को कोल्ड डे माना जाता। शनिवार सुबह 10 बजे के बाद मौसम साफ होने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में घना कोहरा होगा। साथ ही न्यूनतम तापमान में गिरावट आएगी।