Difference Between NPS and EPF: भारत में हर नौकरीपेशा व्यक्ति के मन में रिटायरमेंट के बाद के सुरक्षित जीवन को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है। अपने बुढ़ापे को आर्थिक रूप से मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए लोग मुख्य रूप से भविष्य निधि यानी ईपीएफ और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी एनपीएस में निवेश करते हैं।
हालांकि, दोनों ही योजनाएं रिटायरमेंट के लिए बेहतरीन मानी जाती हैं, लेकिन दोनों की कार्यप्रणाली, निवेश के तरीके और मिलने वाले रिटर्न में बहुत बड़ा अंतर होता है। सही जानकारी न होने के कारण लोग यह तय नहीं कर पाते कि उनके लिए कौन सा विकल्प बेहतर है। आइए इस लेख में जानते हैं कि एनपीएस और ईपीएफ में क्या मुख्य अंतर है।
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ईपीएफ क्या होता है?
- फोटो : EPFO
ईपीएफ क्या होता है?
- ईपीएफ यानी एम्पलाइज प्रोविडेंट फंड नौकरीपेशा लोगों के लिए बनाई गई एक बेहद महत्वपूर्ण और अनिवार्य सरकारी बचत योजना होती है।
- इस योजना के तहत कर्मचारी की हर महीने की सैलरी से एक निश्चित हिस्सा काटकर जमा किया जाता है, जिस पर सरकार की तरफ से पूरी तरह सुरक्षित और तय ब्याज दर से मुनाफा मिलता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
एनपीएस कैसे काम करता है?
- एनपीएस एक स्वैच्छिक और आधुनिक पेंशन योजना है जो पूरी तरह शेयर बाजार पर आधारित होती है।
- इस योजना में आपका जमा किया गया पैसा सरकार के सुरक्षित बॉड्स के साथ-साथ शेयर बाजार में भी निवेश किया जाता है, जिसके कारण मिलने वाला रिटर्न पूरी तरह से बाजार के उतार-चढ़ाव और उसकी स्थिति पर निर्भर करता है।
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किसमें मिलता है ज्यादा रिटर्न?
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किसमें मिलता है ज्यादा रिटर्न?
- शेयर बाजार और इक्विटी से जुड़े होने के कारण एनपीएस में लंबी अवधि के दौरान ईपीएफ की तुलना में काफी ज्यादा, बेहतर और आकर्षक रिटर्न मिलने की पूरी संभावना रहती है।
- हालांकि, इसमें बाजार का थोड़ा जोखिम भी शामिल होता है, लेकिन लंबे समय में यह निवेश को तेजी से बढ़ाने का एक शानदार जरिया साबित होता है।
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कौन सा विकल्प है बेहतर?
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कौन सा विकल्प है बेहतर?
- अगर आप अपने पैसे की पूरी सुरक्षा और गारंटीड रिटर्न चाहते हैं, तो आपके लिए ईपीएफ सबसे अच्छा विकल्प है।
- वहीं दूसरी ओर, यदि आप थोड़ा जोखिम उठाकर भविष्य के लिए ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो एनपीएस एक बेहद शानदार और आधुनिक वित्तीय योजना साबित होती है, जो रिटायरमेंट पर बड़ा फंड देती है।