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जरूर जानें: क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी कर रहा है भारत, पीएम मोदी ने कही ये बात

Fri, 15 Aug 2025 02:22 PM IST
शिखर बरनवाल यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Fri, 15 Aug 2025 02:22 PM IST
सार

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के बारे में बताया।
  • इस मिशन का उद्देश्य भारत को भविष्य की प्रौद्योगिकियों, जैसे इलेक्ट्रिक वाहन और स्वच्छ ऊर्जा, के लिए आवश्यक खनिजों में आत्मनिर्भर बनाना है।

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What is national Critical Mineral Mission pm modi says from red fort on independence day
राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन - फोटो : Adobe Stock

National Critical Minerals Mission: 15 अगस्त, 2025 को 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण घोषणा की जिसने भारत की भविष्य की रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा तय कर दी है। अपने 12वें ऐतिहासिक भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने 'राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन' की शुरुआत का जिक्र किया। 



उन्होंने कहा कि 'हमारे लिए क्रिटिकल मिनिरल क्षेत्र में आत्मनिर्भर्ता बहुत अनिवार्य है। एनर्जी का सेक्टर हो, इंडस्ट्री का सेक्टर हो, रक्षा क्षेत्र हो, टेक्नोलाजी का क्षेत्र हो, आज क्रिटिकल मिनरल्स की टेक्नोलॉजी के अंदर बहुत अहम भूमिका है और इसलिए नेशनल क्रिटिकल मिशन हमाने लांच किया है, 1200 से अधिक स्थानों पर खोज का अभियान चल रहा है और हम क्रिटिकल मिनरल में भी आत्म निर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।' यह मिशन भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता कम करने और भविष्य की तकनीकों में अग्रणी भूमिका निभाने में मदद करेगा। बता दें कि इस मिशन की शुरुआत 29 जनवरी, 2025 को ही हो चुकी है।

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राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन - फोटो : Adobe Stock

क्रिटिकल मिनरल्स का महत्व और वैश्विक परिदृश्य
क्रिटिकल मिनरल्स, जैसे कि लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट, और रेयर अर्थ एलिमेंट्स, आधुनिक प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर, स्मार्टफोन, सोलर पैनल, पवन टर्बाइन और रक्षा उपकरणों में किया जाता है।

वर्तमान में इन खनिजों की आपूर्ति पर कुछ ही देशों का एकाधिकार है, जिससे भारत सहित कई देश अपनी तकनीकी और ऊर्जा जरूरतों के लिए उन पर निर्भर हैं। इस निर्भरता को कम करने के लिए भारत ने अब इन खनिजों के घरेलू अन्वेषण, खनन और प्रसंस्करण पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है।
 

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राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन - फोटो : Adobe Stock

मिशन का उद्देश्य और प्रमुख रणनीतियां
'राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन' का मुख्य उद्देश्य भारत को क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। इस मिशन के तहत, सरकार कई प्रमुख रणनीतियों पर काम करेगी। सबसे पहले देश भर में नए खनिज भंडारों का पता लगाने के लिए भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और अन्वेषण को तेज किया जाएगा।

इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा। दूसरा, खनन प्रक्रियाओं को पर्यावरण के अनुकूल और कुशल बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। तीसरा, भारत में इन खनिजों के प्रसंस्करण और शोधन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा, ताकि कच्चे खनिजों के लिए हमें दूसरे देशों पर निर्भर न रहना पड़े।

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राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन - फोटो : Adobe Stock

मिशन का आर्थिक और सामरिक प्रभाव
इस मिशन का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुआयामी प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता से भारत में इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में उत्पादन लागत कम होगी। यह मेक इन इंडिया पहल को एक नई गति देगा और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक विश्वसनीय भागीदार बनाएगा। 

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राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन - फोटो : Adobe Stock

रणनीतिक रूप से यह मिशन भारत की रक्षा क्षमताओं को भी मजबूत करेगा, क्योंकि कई उन्नत रक्षा प्रणालियों के लिए इन खनिजों की आवश्यकता होती है। यह भारत को भू-राजनीतिक दबावों से भी बचाएगा जो इन खनिजों के आपूर्तिकर्ता देशों द्वारा डाले जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिशन भारत को 21वीं सदी की 'नई औद्योगिक क्रांति' में एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।

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