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DIGIPIN: 6 अंकों वाले पुराने पिन कोड को कहें गुड बाय, भारत में लॉन्च हो रहा नया डिजिटल एड्रेस सिस्टम DIGIPIN
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संकल्प सिंह
Updated Fri, 10 Oct 2025 05:40 PM IST
सार
What Is Digipin: डाक विभाग के उप महानिदेशक ने नई एड्रेसिंग प्रणाली-डिजिपिन को पेश करते हुए इस बारे में बताया कि साल 1972 में पार्सल की छंटाई और वितरण के लिए पुरानी पिन कोड प्रणाली को शुरू किया गया था।
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डिजिपिन
- फोटो : अमर उजाला
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What Is Digipin: पिन कोड में 6 अंकों की संख्या होती है। यह कोड आप किस जगह पर रहते हैं इसे बताने के लिए उपयोग किया जाता है। इससे आपकी लोकेशन के बारे में पता चलता है। इसी वजह से पिन कोड की मदद से डाक या पार्सल को सही जगह पर पहुंचाने में आसानी होती है। हालांकि, अब पिन कोड की व्यवस्था बदलने वाली है। भारत में अब एक खास तरह की नई एड्रेसिंग प्रणाली Digipin लॉन्च हो रही है।
डिजिपिन बदलते समय की मांग है। इसकी मदद से किसी भी लोकेशन तक पार्सल को सटीकता से पहुंचाया जा सकता है। हाल ही में डाक विभाग के उप महानिदेशक ने नई एड्रेसिंग प्रणाली-डिजिपिन को पेश करते हुए इस बारे में बताया कि साल 1972 में पार्सल की छंटाई और वितरण के लिए पुरानी पिन कोड प्रणाली को शुरू किया गया था। वहीं अब इसमें और सटीकता की जरूरत है। इस कारण हमें एक मानकीकृत एड्रेसिंग प्रणाली की जरूरत है।
इस दौरान उन्होंने इस बारे में बताया कि हमने हर स्थान को 10 अंकों के अल्फान्यूमेरिक नंबर में बदल दिया है। इसे ही डिजिपिन कहा जाता है। डिजिपिन का उपयोग किए जाने से एड्रेस की सटीकता और भी ज्यादा बढ़ जाएगी।
डिजिपिन 10 अंकों का एक अल्फान्यूमेरिक कोड होता है, जो कि आपकी लोकेशन के सटीक कोऑर्डिनेट्स के आधार पर जनरेट होता है। यह कोड 4 मीटर * 4 मीटर ग्रिड में किसी स्थान को दर्शाने का काम करता है।
डिजिपिन के उपयोग से केवल कूरियर या लॉजिस्टिक्स के लिए ही नहीं बल्कि इसका इस्तेमाल इमरजेंसी सेवाओं को बुलाने में भी किया जा सकता है। इसको साझा करने के बाद सेवाएं सीधे आपके लोकेशन तक पहुंचेंगी।
डिजिपिन सिस्टम को IIT हैदराबाद, NRSC और ISRO ने मिलकर बनाया है। इसका उद्देश्य देश के हर एक लोकेशन को डिजिटल पहचान देना है। अब आपको किसी को कूरियर या पार्सल भेजने के लिए पुराने पिन कोड की जरूरत नहीं होगी।
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