Independence Day 2022: देश इस साल अपनी आजादी के 75 वर्ष पूरे कर रहा है। हमारी आजादी का 75 सालों का ये सफर काफी उतार-चढ़ाव से भरा रहा। हालांकि, इस सफर में आने वाली कई रुकावटों के बाद भी हम निरंतर आगे बढ़ते रहे। इसी कड़ी में आज हम आपको आजादी के बाद भारत के उन पांच बड़े फैसलों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने देश की दिशा को बदलने में निर्णायक भूमिका निभाई है। इन फैसलों ने देश के विकास की रफ्तार को बढ़ाने का काम किया है। आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से -
Independence Day 2022: आजाद भारत के वो पांच बड़े फैसले, जिन्होंने देश को नई दिशा दिखाने का काम किया
बैंकों का राष्ट्रीयकरण
साल 1969 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लिया गया बैंकों के राष्ट्रीयकरण का फैसला एक बड़ा कदम था। इस दौरान देश के 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया। बैंकिंग सेक्टर को तेजी से बढ़ावा देने के लिए इस निर्णय को लिया गया। आज इसी की वजह से निजी क्षेत्र की भागीदारी बैंकिंग सेक्टर में बढ़ रही है।
हरित क्रांति
भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा भाग कृषि पर आधारित है। हालांकि, पहले ऐसा नहीं था। 1967-68 और 77-78 की अवधि में हरित क्रांति के कारण भारत की कृषि पैदावार में रिकॉर्ड इजाफा देखने को मिला। हरित क्रांति की वजह से ही देश का नाम अग्रणी कृषि देशों की फेहरिस्त में शामिल हुआ। देश में हरित क्रांति का नेतृत्व एम.एस स्वामीनाथन द्वारा किया गया।
जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स)
1 जुलाई 2017 को जीएसटी भारत में लागू हुई। देश की टैक्स प्रणाली के ढांचे को सुधारने के लिए जीएसटी एक बड़ा फैसला था। जीएसटी एक अप्रत्यक्ष कर है। इसके लागू होने के बाद देशभर में सभी वस्तुओं और सेवाओं पर एक ही कर लगने लगा।
नीति आयोग का गठन
साल 2014 में योजना आयोग को खत्म करके नीति आयोग का गठन किया गया। नीति आयोग के गठन का उद्देश्य देश की आर्थिक सुधारों की आवश्यकताओं को पूरा करना है। नीति आयोग भारत सरकार का थिंक टैंक है। नीति आयोग भारत सरकार को आर्थिक और विकासात्मक सुधारों से जुड़े सुझावों की पेशकश करता है। देश को विकासात्मक दिशा की ओर अग्रसर करने के लिए नीति आयोग का गठन भी एक बड़ा फैसला था।