Festive Season Online Bumper Sale: त्योहारी सीजन शुरू होने जा रहा है। ऐसे में देश की बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां बंपर सेल निकालने की तैयारियां कर चुकी हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से लेकर समाचार पत्रों और टीवी एड्स में इन सेल्स का जमकर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। ई-कॉमर्स की दुनिया में होने वाली इस बंपर सेल में प्रोडक्टस की कीमतों को सामान्य से भी कम कीमत पर बेचे जाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। सवाल है कि क्या ऐसा सही में होता है या यहां पर हमारे मनोविज्ञान के साथ खेला जाता है? इसी कड़ी में आज इस खबर के माध्यम से हम आपको ई-कॉमर्स की दुनिया में बंपर सेल के पर्दे के पीछे जो कहानियां छिपी होती हैं। उनके बारे में बताएंगे। यही नहीं हम यह जानने की कोशिश भी करेंगे कैसे ये ई-कॉमर्स कंपनियां हमारी साइकोलोजी कौ हैक करके हमें उन प्रोडक्ट्स को भी खरीदने पर मजबूर कर देती हैं, जिनकी हमें कोई खास जरूरत नहीं होती।
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फोमो इफेक्ट (FOMO Effect)
फोमो इफेक्ट का जमकर इस्तेमाल मार्केटिंग स्ट्रेटजी में किया जाता है। ई-कॉमर्स कंपनियां जब अपनी सेल की शुरुआत करती हैं। उस दौरान ये लिमिटेड टाइम ऑफर्स, फ्लैश सेल, लिमिटेड स्टॉक क्लेम निकालती हैं। इन्हें देखकर ग्राहकों के मन में FOMO Effect (Fear Of Missing Out) पैदा होता है। उन्हें लगता है कि कहीं इस डील को खरीदने में हम देरी न कर दें। इस खास तरह की मार्केटिंग स्ट्रेटजी के माध्यम से ये कंपनियां ग्राहकों को तेजी से किसी खास प्रोडक्ट को खरीदने के लिए मजबूर करती हैं। खास बात यह है कि फोमो इफेक्ट से प्रोडक्ट की बिक्री में रिकॉर्ड इजाफा देखने को मिलता है।
सोशल प्रूफ (Social Proof)
किसी प्रोडक्ट को बेचने के लिए ई-कॉमर्स कंपनियां सोशल प्रूफिंग का सहारा लेती हैं। इसमें ई-कॉमर्स कंपनियां किसी खास प्रोडक्ट को लेकर यह दिखाती हैं कि उसको कितने लोगों ने खरीदा है और उस प्रोडक्ट पर लोगों ने कितनी रेटिंग और रिव्यू दिए हैं। यह तरीका ग्राहकों को यह बतलाता है कि संबंधित प्रोडक्ट को खरीदकर लोग कितने खुश हैं। इससे उनके मन में उत्पाद को लेकर विश्वास और संतोषजनक भावना उत्पन्न होती है और वह उसको खरीद लेते हैं।
डिस्काउंट पर्सेप्शन (Discount Perception)
सेल के दौरान प्रोडक्ट को बेचने के लिए ई-कॉमर्स कंपनियां इस तरीके को अपनाती हैं। इसमें ग्राहक के मन में डिस्काउंट का पर्सेप्शन बनाया जाता है। इसमें सेलिंग प्राइस को एमआरपी से कम करके ग्राहकों के मन में भ्रम पैदा किया जाता है। इससे ग्राहकों के दिमाग का साइकोलोजिकल रिवार्ड सिस्टम ट्रिगर हो जाता है और दिमाग में डोपामीन निकलता है और ग्राहक को लगता है कि वह सामान्य से कम कीमत पर वस्तु या उत्पाद को खरीद रहा है। हालांकि, हकीकत में ऐसा कुछ होता नहीं है बल्कि यह एक मार्केटिंग स्ट्रेटजी होती है।
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इमोशनल अपील (Emotional Appeal)
ई-कॉमर्स कंपनियां त्योहारी सीजन में शुरू होने वाली सेल्स को सकारात्मक भावनाओं के साथ जोड़कर प्रदर्शित करती हैं। इसको लेकर ये कंपनियां जीवंत विज्ञापन, मनोरंजक स्लोगन पंचलाइन और उत्साहवर्धक टीवी एड्स दर्शकों को दिखाती हैं। इससे ग्राहकों के भीतर सेल्स को लेकर उत्सुकता बढ़ती है और वेबसाइट पर आने के बाद उनके भीतर प्रोडक्ट्स को खरीदने की इच्छा निर्मित होती है।