आज के डिजिटल दौर में साइबर ठग लोगों को फंसाने के लिए हर दिन नए तरीके अपना रहे हैं। कभी इनाम जीतने का लालच दिया जाता है तो कभी किसी पार्सल या डिलीवरी के नाम पर फोन किया जाता है। खास बात यह है कि ऐसे मामलों में पढ़े-लिखे और डिजिटल जानकारी रखने वाले लोग भी फंस सकते हैं। ठग अक्सर सामने वाले को इतना जल्दी में डाल देते हैं कि उसे सोचने या जानकारी की जांच करने का मौका ही नहीं मिलता। तो आइए विस्तार से जानते हैं।
न ऑर्डर किया, न सामान मंगाया, फिर भी आया डिलीवरी कॉल; ओटीपी दिया तो हो सकता है बड़ा नुकसान
Cyber Fraud: साइबर ठग अब फर्जी लिंक भेजने के साथ-साथ इनाम, पार्सल और फोन कॉल के जरिए भी लोगों को जल्दी में फैसला लेने पर मजबूर कर रहे हैं। बिना ऑर्डर वाले पार्सल के नाम पर मांगा गया ओटीपी भी बड़ा खतरा बन सकता है।
4 हजार की खरीदारी के बाद आईफोन का लालच
रिपोर्ट के मुताबिक ‘प्रेरणा’ नाम की एक कामकाजी महिला को एक स्किनकेयर वेबसाइट से करीब 4 हजार रुपये की खरीदारी करने पर आईफोन जीतने का मौका मिलने की बात कही गई। इसके बाद उन्हें एक अनजान व्यक्ति का फोन भी आया। कॉल करने वाले ने दावा किया कि उनके पिता ने उनका नंबर दिया है और उनसे एक तय रकम भेजने को कहा। हालांकि, दोनों मामलों में महिला ने पैसे नहीं भेजे। यह मामला दिखाता है कि साइबर ठग किसी आकर्षक ऑफर के जरिए पहले भरोसा बनाने की कोशिश कर सकते हैं और फिर पैसे या निजी जानकारी मांग सकते हैं।
बिना ऑर्डर किए आया डिलीवरी का फोन
एक दूसरे मामले में एक व्यक्ति ने खुद को डिलीवरी पार्टनर बताया। उसने कहा कि एक कैश ऑन डिलीवरी पैकेज महिला के पते पर आया है और ऑर्डर रद्द करने के लिए ओटीपी चाहिए। महिला ने अपने शॉपिंग ऐप पर जांच की तो वहां ऐसा कोई ऑर्डर नहीं था। इसके बावजूद फोन करने वाला पैकेज वापस लेने से इनकार करता रहा और कैंसिलेशन ओटीपी मांगता रहा। महिला ने ओटीपी साझा कर दिया। बाद में परिवार से बात करने पर उन्हें शक हुआ कि यह ठगी की कोशिश हो सकती है। इसके बाद उन्होंने तुरंत बैंकिंग पासवर्ड और यूपीआई पिन बदल दिए।
पढ़े-लिखे लोग भी बन रहे निशाना
साइबर ठगी का खतरा केवल कम डिजिटल जानकारी रखने वाले लोगों तक सीमित नहीं है। आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं की एक हालिया स्टडी में भी सामने आया कि डिजिटल रूप से अनुभवी और उच्च शिक्षा प्राप्त लोग वित्तीय साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं। ठग डर, तनाव और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। ऐसे समय में लोग कई बार वह गलती कर बैठते हैं, जो सामान्य स्थिति में शायद न करें।
2021 से 2025 तक बढ़ीं शिकायतें
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ी 65.89 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 55,050 करोड़ रुपये से अधिक की रकम शामिल थी। 2021 में करीब 2.62 लाख शिकायतें थीं, जो 2025 में बढ़कर 24.02 लाख हो गईं।
इन बातों का रखें ध्यान
किसी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, बैंकिंग पासवर्ड या यूपीआई पिन न बताएं। बिना ऑर्डर किए किसी पार्सल की डिलीवरी के नाम पर कैंसिलेशन ओटीपी मांगा जाए तो उसे बिल्कुल साझा न करें। किसी लिंक पर क्लिक करने से पहले भी उसकी जांच करें। अगर साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर शिकायत करें। सबूत के तौर पर एसएमएस, चैट, ईमेल, फोन नंबर, ट्रांजैक्शन की रसीद और संदिग्ध लिंक सुरक्षित रखें। बैंकिंग पासवर्ड और संबंधित पिन भी तुरंत बदल दें।
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