स्मार्टफोन के थर्ड पार्टी ऐप चुराते हैं आपकी गोपनीय जानकारी, इनसे बचने के ये हैं तरीके

हर्षित कुमार 'हर्ष', अमर उजाला, नोएडा
Wed, 25 Apr 2018 06:35 PM IST
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Third party App are stealing your data from smartphone, Know how to be safe
online privacy

    फेसबुक डाटा लीक विवाद की वजह से सोशल नेटवर्किंग कंपनी फेसबुक को करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ है। यूजर्स के डाटा को सुरक्षित न रख पाने की वजह से फेसबुक की काफी आलोचना हुई, जिसके बाद कंपनी के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने लोगों से माफी मांगी और यूजर्स के डाटा को सुरक्षित रखने के लिए बदलाव की बात की। इससे पहले भी टारगेट डाटा ब्रीच की वजह से एक महीने में ही करीब सात करोड़ क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड की जानकारियां लीक हुई थीं, जबकि कंपनी के आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में कोई खामी नहीं थी, फिर भी डाटा लीक हुआ, जिसमें मूलरूप से थर्ड पार्टी का हाथ था। फेसबुक डाटा लीक में शुरुआती जांच से पता चलता है कि थर्ड पार्टी ऐप्स को परमिशन देने की वजह से ही यह घटना संभव हो सकी है। कुछ सावधानी बरतकर हम अपने डाटा या निजी जानकारियों को लीक होने से बचा सकते हैं।

    dlp software
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    महत्वपूर्ण डाटा की पहचान

    सबसे पहले व्यवसाय में इस्तेमाल हो रहे यूजर्स के महत्वपूर्ण डाटा की पहचान करनी चाहिए। इससे हमें उस डाटा के बारे में जानकारी हो जाती है, जिसे सबसे ज्यादा सुरक्षा की जरूरत होती है। इसके लिए डाटा लॉस प्रिवेन्शन सॉफ्टवेयर (डीएलपी) का इस्तेमाल करना चाहिए। इस तरह के महत्वपूर्ण डाटा किसी भी योजना का ब्लू-प्रिंट, वित्तीय लेखा-जोखा या फिर किसी भी तरह की निजी तस्वीरें भी हो सकती हैं। डीएलपी सॉफ्टवेयर सुरक्षित की जाने वाली जानकारियों को वर्गीकृत कर देता है, जिसके बाद संस्था या आपको उसकी सुरक्षा के लिए एक योजना के तहत अत्यंत ही महत्वपूर्ण जानकारियों के रख-रखाव की उचित व्यवस्था करनी होती है। यह एक तरह का उत्कृष्ट उपाय है, जिसकी मदद से आप सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को हानि पहुंचने से बचा सकते हैं।

    hacker
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    पहुंच और गतिविधियों की निगरानी

    डाटा को सुरक्षित रखने के लिए अगला कदम होता है, उसकी पहुंच और गतिविधियों की निगरानी करना। इस स्टेप में हम ध्यानपूर्वक सभी डाटा ट्रैफिक की निगरानी करते हैं और देखते हैं कि जानकारियों को किस नेटवर्क पर भेजा गया है। इस स्टेप में हम अपने व्यवसाय से जुड़ी निजी जानकारियों के बारे में एक रियल-टाइम तस्वीर के बारे में पता लगा सकते हैं। इसे डाटा एक्टिविटी मॉनिटरिंग (डैम) कहते हैं। इसके उपयोग से अनधिकृत कार्यों का पता लग सकता है।

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