आखिर विदेशी सर्वर पर क्यों स्टोर होता है आपका डाटा, क्या हैं इसके खतरे, जानें यहां

भारत-चीन तनाव के बीच सोमवार को भारत सरकार ने 59 एप्स बंद करने की घोषणा की है। इन एप्स में लोकप्रिय सोशल मीडिया एप टिकटॉक और वीचैट भी शामिल हैं। अलीबाबा ग्रुप के यूसी ब्राउजर, फैशन वेंडर शीइन और बाइडु मैप्स पर भी पाबंदी लगाई गई है। इनका इस्तेमाल एप्स और पर्सनल कंप्यूटर दोनों पर किया जाता रहा है। भारत सरकार ने अपने इस फैसले को आपातकालीन उपाय और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है। भारत और चीन की सेना लद्दाख में सरहद पर आमने-सामने है और 15-16 जून को दोनों सेनाओं के बीच हुई झड़प में एक कर्नल समेत भारत के 20 सैनिक मारे गए थे।
भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट कर कहा, ''यह पाबंदी सुरक्षा, संप्रभुता और भारत की अखंडता के लिए जरूरी है। हम भारत के नागरिकों के डाटा और निजता में किसी तरह की सेंध नहीं चाहते हैं।'' जिस डाटा की निजता की बात प्रसाद कर रहे थे, वो डाटा इन विदेशी कंपनियों के सर्वर पर स्टोर होता है। एप के इस्तेमाल के दौरान हम इन्हें कई तरह की परमिशन देते हैं। कई एप हमारे कैमरे और माइक्रोफोन का एक्सेस मांगते हैं, इससे तस्वीरें और दूसरी तरह की जानकारियां जुटाते हैं और इनका अलग-अलग तरीके से अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं।

ज्यादातर कंपनियां जो हमें फ्री सर्विस देती हैं, वो हमारे डाटा का इस्तेमाल अपने मुनाफे के लिए करती हैं। इसका सबसे अच्छा उदाहरण ये है कि आप किसी प्रोडक्ट के बारे में सर्च करते हैं तो कुछ देर बाद आपको उससे जुड़ा विज्ञापन दिखने लगता है। अब सरकार को डर है कि दूसरे देशों में स्टोर हमारे डाटा का इस्तेमाल देश के लोगों के खिलाफ किया जा सकता है। अब सवाल ये उठता है कि आखिर आपका इतना डाटा विदेशी सर्वर पर स्टोर क्यों हो रहा है?

विदेशों में क्यों हो रहा है डाटा स्टोर
डाटा स्टोर करने वाली कंपनियां मुख्य रुप से दो तरह की होती हैं - बी2बी यानि बिज़नेस टू बिज़नेस और बी2सी यानी बिजनेस टू कंज्यूमर। बी2बी में वो कंपनियां होती हैं जिनका बिजनेस दो कंपनियों के बीच होता है, जैसे कि उत्पादक और होलसेलर। बी2सी कंपनियों का सीधा कनेक्शन ग्राहकों से होता है। शॉपिंग वेबसाइट्स से लेकर कई सोशल मीडिया वेबसाइट बी2सी के अंतर्गत आती हैं। ज्यादातर जिन कंपनियों के एप आप इस्तेमाल करते हैं, वो विदेश की हैं, चाहे वो सोशल मीडिया वेबसाइट्स से जुड़ी कंपनियां हों या शॉपिंग से, इसलिए उनका सर्वर भी दूसरे देश में है। इसके अलावा कंपनियां सुचारू ढ़ंग से काम करने के लिहाज से भी डाटा एक जगह पर स्टोर करना चाहती हैं। कई कंपनियों का अपना सर्वर नहीं होता, वो किसी थर्ड पार्टी के सर्वर का इस्तेमाल करती हैं।