Dark Web: क्या होता है डार्क वेब, जानिए कैसे अमेरिका ने की इसकी शुरुआत?

इंटरनेट के आने के बाद विश्व एक मोबाइल में सिमट गया है। इसने सूचना तंत्र को गति दी है, जिसके चलते वैश्वीकरण को एक नया आयाम मिला है। इंटरनेट की वजह से आज वैश्विक अर्थव्यवस्था 86 ट्रिलियन डॉलर के ऊपर पहुंच गई है। इसके आने के बाद कई स्टार्टअप्स को आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। इंटरनेट ने बिजनेस, एजुकेशन, कम्युनिकेशन आदि विभिन्न क्षेत्रों में क्रांति ला दी है। इसी वजह से आज के दौर को डिजिटल युग की संज्ञा दी जा रही है। एक तरफ इंटरनेट के आने के बाद जहां विश्व को आगे बढ़ने का एक नया मौका मिला है। वहीं दूसरी तरफ इसका एक डरावना पहलू भी सामने निकलकर आया है, जिसका नाम है डार्क वेब। आप में से कई लोगों ने डार्क वेब का नाम सुना होगा। आज हम इसी के बारे में जानेंगे और इस बात का भी पता लगाएंगे कि आखिर डार्क वेब की शुरुआत कैसे हुई?

क्या है डार्क वेब
डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है, जिसे सर्च इंजन पर इंडेक्स नहीं किया जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो इंटरनेट का जितना हिस्सा हम प्रयोग करते हैं। वह केवल 4 प्रतिशत है। इसे सरफेस वेब के नाम से जाना जाता है। वहीं इंटरनेट का बाकी बचा हुआ 96 प्रतिशत हिस्सा डीप वेब और डार्क वेब है। डार्क वेब को आप सामान्य ढंग से एक्सेस नहीं कर सकते हैं।

इसके लिए आपको अपना आईपी एड्रेस बदलकर एक खास ब्राउजर का इस्तेमाल करना होगा। इसके अलावा वीपीएन और कई anonymity tools का इस्तेमाल डार्क वेब पर सर्फिंग करने के लिए करना होता है। डार्क वेब पर ऐसी गतिविधियां होती हैं, जिनके बारे में आप सोच नहीं सकते हैं। यहां पर मानव तस्करी, ड्रग्स स्मगलिंग, सरकारों के डिफेंस सीक्रेट्स को हैक करना, Child Trafficking, हथियारों की खरीदारी और ऐसी कई खतरनाक चीजों को अंजाम दिया जाता है, जिनके बारे में कल्पना भी नहीं की जा सकती है।