Chromium: गूगल की अपनी तकनीकें अब उसके खिलाफ खड़ीं, एआई के दौर में क्यों डगमगाई सर्च में बादशाहत?
Google Chromium:
गूगल, जिसने इंटरनेट सर्च को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, अब उसी की बनाई तकनीकें उसके लिए चुनौती बन रही हैं। एआई के इस दौर में गूगल का एक प्रोडक्ट उसके रास्ते में नई मुसीबतें खड़ी कर रहा है।

गूगल आज ऐसे दौर में है जब उसके अपने ही आविष्कार उसके लिए चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। दशकों तक सर्च इंजन और ब्राउजर में एकाधिकार रखने वाली टेक कंपनी गूगल को आज नई कंपनियों से चुनौती मिलने लगी है। हाल ही में OpenAI ने Atlas और Perplexity ने Comet वेब ब्राउजर को लॉन्च किया है। दिलचस्प बात ये है कि दोनों ही ब्राउजर एक ऐसे प्लेटफॉर्म पर आधारित हैं जिसकी नींव खुद गूगल ने रखी थी। आज हम आपको बताएंगे कि कैसे गूगल का यह फ्री प्लेटफॉर्म उसी के लिए सिरदर्द बन चुका है।
आज भी इंटरनेट सर्च के लिए गूगल सबसे भरोसेमंद सर्च इंजन बना हुआ है। कई लोग तो हर छोटी से छोटी चीज के लिए गूगल सर्च करते हैं। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। Perplexity और OpenAI के एआई बेस्ड सर्च इंजन, गूगल के दशकों पुराने दबदबे को चुनौती दे रहे हैं। एआई प्लेटफॉर्म्स के आने से गूगल की परंपरागत सर्च घटने लगी है।

ट्रांसफॉर्मर: जिसने AI की दिशा ही बदल दी
12 जून 2017 को गूगल के शोधकर्ताओं ने एक पेपर प्रकाशित किया जिसका शीर्षक "Attention Is All You Need" रखा गया था। इसमें "ट्रांसफॉर्मर" नाम के न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्चर को दुनिया के सामने पेश किया गया था। इस पेपर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में क्रांति ला दी।
ट्रांसफॉर्मर मॉडल की सबसे खास बात यह थी कि यह किसी वाक्य के सभी शब्दों को लाइन-बाई-लाइन प्रोसेस करने के बजाए एक साथ प्रोसेस कर सकता था। इससे मॉडल का ट्रेनिंग टाइम घटा और नतीजे पहले से कहीं बेहतर आए। इसी ने GPT जैसे बड़े लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) के लिए रास्ता खोला।

आफत बना खुद का ओपन-सोर्स इंजन
2008 में गूगल ने क्रोम ब्राउजर के साथ उसका ओपन-सोर्स इंजन क्रोमियम (Chromium) भी जारी किया था। क्रोमियम एक ओपन-सोर्स (Open Source) वेब ब्राउजर प्रोजेक्ट है जिसका सोर्स कोड सबके लिए खुला है। यानी कोई भी डेवलपर इसे देखकर अपने हिसाब से ब्राउजर बना सकता है। Chromium वो नींव है जिस पर Google Chrome और कई अन्य ब्राउजर बनाए गए हैं। Google ने इसे ओपन-सोर्स इसलिए किया ताकि इंटरनेट टेक्नोलॉजी तेजी से आगे बढ़े, लेकिन अब यही कदम उसके लिए चुनौती भी बन रहा है, क्योंकि दूसरी कंपनियाँ इसी Chromium इंजन पर अपने AI-पावर्ड ब्राउजर बना रही हैं।
Microsoft Edge, Brave, Opera जैसे ब्राउजर्स Chromium के इंजन का इस्तेमाल करते हैं और अब उनमें से कई अपने AI-आधारित असिस्टेंट्स या सर्च टूल्स को डिफॉल्ट बना रहे हैं। ओपन-सोर्स होने के वजह से इसके इस्तेमाल से कोई भी अपना वेब ब्राउजर बना सकता है।