यूएई के पास विमानों पर डिजिटल अटैक: जीपीएस स्पूफिंग से मचा हड़कंप, समझिए क्या है ये नई मुसीबत

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Thu, 05 Mar 2026 03:48 PM IST
सार

GPS Spoofing Middle East Tensions:

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के हवाई क्षेत्र के पास उड़ने वाले विमानों के लिए एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। युद्ध के बीच 'जीपीएस स्पूफिंग' की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे विमानों के नेविगेशन सिस्टम को गलत सिग्नल मिल रहे हैं। आइए जानते हैं जीपीएस स्पूफिंग क्या है और उड़ानों की सुरक्षा के लिए ये कैसे एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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क्या जीपीएस स्पूफिंग? - फोटो : Adobe Stock

    ईरान पर इस्त्राइल और अमेरिका के हमले के बाद मध्य पूर्व में बीते कुछ दिनों से तनाव की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच जीपीएस स्पूफिंग के मामले भी देखे जा रहे हैं। उड़ानों की लाइव ट्रैकिंग प्रदान करने वाले प्लेटफॉर्म 'फ्लाइटरडार24' के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात के आसपास जीपीएस स्पूफिंग के जरिए उड़ानों को भटकाने की कोशिश की जा रही है। इससे क्षेत्र से गुजरने वाले उड़ानों के लिए गंभीर खतरें पैदा हो गए हैं।

    यूएई एक बड़ा ग्लोबल एविएशन हब है, इसलिए यहां से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इसका असर सबसे ज्यादा दिख रहा है। तो चलिए जानते हैं क्या है जीपीएस स्पूफिंग और एविएशन इंडस्ट्री के लिए इसे क्यों खतरनाक माना जाता है।

    क्या है यह जीपीएस स्पूफिंग?
    क्या है यह जीपीएस स्पूफिंग? - फोटो : Adobe Stock

    क्या है यह जीपीएस स्पूफिंग?

    सरल शब्दों में कहें तो 'जीपीएस स्पूफिंग' एक तरह की विमानों के रेडार सिस्टम से होने वाली धोखाधड़ी है। इसमें रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए विमान के रिसीवर को फर्जी सिग्नल भेजे जाते हैं। इससे विमान के कंप्यूटर को लगता है कि वह अपनी सही लोकेशन से कहीं दूर है या अपना रूट भटक गया है।

    विमान अपना रास्ता तय करने के लिए जीपीएस पर निर्भर होते हैं, जिससे पायलट को विमान की सही लोकेशन का पता चलता है। लेकिन जब जीपीएस पर सही लोकेशन नहीं दिखती तो विमान के भटकने का खतरा रहता है।

    यह 'जीपीएस जैमिंग' से कहीं ज्यादा खतरनाक है क्योंकि जैमिंग में सिग्नल गायब हो जाते हैं, लेकिन स्पूफिंग में पायलट को गलत जानकारी देकर गुमराह किया जाता है।

    उड़ानों पर क्या असर पड़ सकता है?
    उड़ानों पर क्या असर पड़ सकता है? - फोटो : Adobe stock

    उड़ानों पर क्या असर पड़ सकता है?

    • जीपीएस स्पूफिंग से सीधा हादसा होना दुर्लभ है, लेकिन इससे उड़ान संचालन में रुकावटें पैदा होती हैं। गलत नेविगेशन के कारण विमान अनजाने में किसी प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र या संवेदनशील सीमा में दाखिल हो सकता है।
    • स्पूफिंग से विमान के 'इनर्शियल रेफरेंस सिस्टम' (IRS) में गड़बड़ी आ सकती है, जिससे विमान के अन्य सुरक्षा उपकरण भी गलत डेटा दिखाने लगते हैं।
    • अगर लैंडिंग के वक्त जीपीएस सही से काम न करे, तो पायलटों को पारंपरिक तरीकों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उड़ानों में देरी हो सकती है।
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