Smartphone Addictoin: बच्चों के लिए स्मार्टफोन क्यों है जहर? समझने के लिए ये पांच वजह हैं काफी

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Sat, 28 Sep 2024 11:43 AM IST
सार

हाल ही में प्रसिद्ध पॉडकास्ट होस्ट और न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. एंड्रयू ह्यूबर्मन के साथ एक साक्षात्कार में सामाजिक मनोवैज्ञानिक डॉ. जोनाथन हाइट ने उन कारणों पर चर्चा की, जिनकी वजह से बच्चों से स्मार्टफोन को दूर रखना चाहिए

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Smartphone Addictoin Why smartphone is poison for children these five reasons are enough to understand
Smartphone Addictoin - फोटो : freepik

    स्मार्टफोन आजकल हर जगह दिखाई देने लगे हैं और हमारे जीवन के लगभग हर पहलू में प्रवेश कर चुके हैं। जहां वयस्क घंटों तक अपने स्मार्टफोन में व्यस्त रहते हैं, वहीं बच्चे भी पीछे नहीं हैं। हालांकि स्मार्टफोन के जरिए जानकारी, मनोरंजन और कनेक्टिविटी तक अभूतपूर्व पहुंच मिलती है, लेकिन बच्चों पर इसके प्रभाव, खासकर मस्तिष्क के विकास को लेकर बढ़ती चिंता देखने को मिल रही है। हाल ही में प्रसिद्ध पॉडकास्ट होस्ट और न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. एंड्रयू ह्यूबर्मन के साथ एक साक्षात्कार में सामाजिक मनोवैज्ञानिक डॉ. जोनाथन हाइट ने उन कारणों पर चर्चा की, जिनकी वजह से बच्चों से स्मार्टफोन को दूर रखना चाहिए।

    Eye Care Tips
    Eye Care Tips - फोटो : iStock

    मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) का बढ़ता जोखिम

    • हाइट ने कहा कि जो बच्चे लंबे समय तक स्क्रीन के सामने समय बिताते हैं, खासकर स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, उनमें मायोपिया या निकट दृष्टि दोष विकसित होने का जोखिम होता है। कई अध्ययनों से पता चला है कि जब बच्चे निकट दूरी पर केंद्रित गतिविधियों, जैसे मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं, तो आंख का आकार बढ़ सकता है, जिससे दृश्य छवियां रेटिना तक ठीक से नहीं पहुंच पातीं। यह परिवर्तन निकट दृष्टि दोष का कारण बनता है, जो आजकल युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है। जो बच्चे अधिक समय घर के अंदर बिताते हैं और प्राकृतिक प्रकाश के संपर्क से वंचित रहते हैं, उनमें इसका जोखिम और अधिक होता है। हाइट ने कहा कि प्राकृतिक प्रकाश के संपर्क में आना आंखों के स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक है और यह मायोपिया की प्रगति को रोकने में भी मदद कर सकता है।
    mobile call new
    mobile call new - फोटो : Adobe Stock

    मस्तिष्क विकास पर स्क्रीन टाइम का प्रभाव

    • स्क्रीन टाइम केवल दृष्टि के लिए ही हानिकारक नहीं है, इसका प्रभाव दूरगामी हो सकता है। 2019 में जामा पीडियाट्रिक्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में पाया गया कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों के संज्ञानात्मक विकास में देरी से जुड़ा है। अध्ययन में पाया गया कि 2 और 3 साल की उम्र में अधिक स्क्रीन टाइम लेने वाले बच्चों का 3 और 5 साल की उम्र में विकासात्मक स्क्रीन परीक्षणों पर खराब प्रदर्शन देखा गया। सीधे शब्दों में कहें तो इसका मतलब है कि प्रारंभिक अवस्था में स्क्रीन के संपर्क में आना भाषा विकास, संचार कौशल और समस्या-समाधान पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। पॉडकास्ट में, ह्यूबर्मन ने समझाया कि मस्तिष्क बचपन से लेकर किशोरावस्था तक महत्वपूर्ण परिवर्तनों से गुजरता है, जिसमें कुछ समयावधि सामाजिक, भावनात्मक और संज्ञानात्मक कौशल विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। इस संवेदनशील समय के दौरान बच्चों को स्मार्टफोन से परिचित कराना मस्तिष्क के प्राकृतिक विकास में बाधा डाल सकता है।
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