डेटा नहीं, RAM है नया 'तेल': कीमतों में 500% के उछाल से बढ़ रही महंगाई, जोहो के श्रीधर वेम्बू ने दी चेतावनी
कभी डेटा को नया तेल कहा जाता था, लेकिन 2026 में तस्वीर बदलती दिख रही है। RAM की कीमतों में भारी उछाल ने सिर्फ फोन और लैपटॉप ही नहीं, बल्कि सर्वर, एआई सेवाओं और आम कारोबार की लागत भी बढ़ा दी है। इससे टेक कंपनियों और आम व्यवसायों के लिए महंगाई का नया संकट खड़ा हो गया है।

आज के समय में यह कहावत बहुत आम हो गई है कि 'डेटा नया तेल है'। लेकिन साल 2026 की दुनिया कुछ और ही सच्चाई बयां कर रही है। अब डेटा नहीं, बल्कि कंप्यूटर मेमोरी यानी RAM असल में नया तेल बन गया है। पिछले एक साल में इसकी कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और इसका सीधा असर हर उस व्यापार पर पड़ रहा है जो तकनीक का इस्तेमाल करता है।

500 प्रतिशत बढ़े RAM के दाम
हाल ही में दिग्गज टेक कंपनी जोहो (Zoho) के चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने इस गंभीर मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि महज एक साल में RAM की कीमतों में 500 प्रतिशत तक का बेतहाशा उछाल आया है। उन्होंने साफ कहा कि मेमोरी की बढ़ती कीमतों ने व्यापार को बहुत मुश्किल बना दिया है। एपल (Apple) के सीईओ टिम कुक सहित कई दिग्गज भी इस आर्थिक दबाव को महसूस कर रहे हैं। यह स्थिति बिल्कुल उस 'ऑयल शॉक' जैसी बन गई है जिसने दशकों पहले पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ा दी थी।

एआई के कारण अचानक बढ़ी डिमांड
कुछ साल पहले तक बाजार में RAM की कोई खास कमी नहीं थी। लेकिन एआई (AI) के आते ही पूरी तस्वीर बदल गई। ChatGPT और Gemini जैसे एआई टूल्स को काम करने के लिए भारी मात्रा में तेज कंप्यूटिंग पावर और ढेरों RAM की जरूरत होती है। बिना मजबूत मेमोरी के एआई सिस्टम काम ही नहीं कर सकते। जिस तरह पुराने ट्रेन इंजन तेल पीते थे, वैसे ही आज के एआई टूल्स RAM की भारी खपत कर रहे हैं।
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