Norton ने भारत में लॉन्च Norton AntiTrack, मोबाइल से लेकर लैपटॉप तक रहेंगे सुरक्षित
Norton AntiTrack को ब्राउजर एक्सटेंशन के तौर पर पेश किया गया है, हालांकि फिलहाल यह केवल मैकबुक और विंडोज के लिए ही है, लेकिन जल्द ही इसका मोबाइल एप वर्जन भी लॉन्च होगा।

साइबर सिक्योरिटी और एंटीवायरस की नामी कंपनी नॉर्टनलाइफलॉक (Norton) ने आज भारत में नई ऑनलाइन प्राइवेसी Norton AntiTrack को पेश किया है। Norton AntiTrack ऑनलाइन दुनिया में यूजर्स की पूरी सिक्योरिटी करता है। थर्ड-पार्टी कंपनियां और वेबसाइट, उपभोक्ताओं की ऑनलाइन सर्च को ट्रैक करती हैं और उनके व्यक्तिगत डेटा जुटाती हैं। नॉर्टन एंटीट्रैक की मदद से लोग इस पर कंट्रोल रख सकते हैं कि क्या उन्हें डिजिटल फुटप्रिंट छोड़ना है या नहीं। Norton AntiTrack कूकिज को भी ब्लॉक करता है।

Norton AntiTrack को ब्राउजर एक्सटेंशन के तौर पर पेश किया गया है, हालांकि फिलहाल यह केवल मैकबुक और विंडोज के लिए ही है, लेकिन जल्द ही इसका मोबाइल एप वर्जन भी लॉन्च होगा। कंपनी के दावे के मुताबिक यदि Norton AntiTrack आपके ब्राउजर में इंस्टॉल है तो सोशल मीडिया साइट्स भी आपको ट्रैक नहीं कर पाएंगी और आपको किसी तरह का कोई विज्ञापन भी नहीं दिखेगा।
इसकी लॉन्चिंग पर नॉर्टनलाइफलॉक के डायरेक्टर ऋतेश चोपड़ा ने कहा, "वैसे तो ढेर सारे ऑनलाइन प्राइवेसी टूल उपलब्ध हैं, लेकिन ज्यादातर कंपनियां हमें हमारी ट्रैक करती हैं। हमारे शोध के मुताबिक बड़े ट्रैकर लगभग सभी ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं की करीब दो-तिहाई ब्राउजिंग हिस्ट्री के बारे में जानते हैं। हर सप्ताह ग्राहकों को 177 अलग-अलग तरह के ट्रैकर का सामना करना पड़ता है। इनमें से 84 फीसदी ट्रैकर का सामना ऑनलाइन जाने के पहले 12 घंटों के दौरान करना पड़ता है।"

ऑनलाइन दुनिया में यूजर्स को कुकीज, फिंगरप्रिंटिंग (इंटरनेट की दुनिया में आपकी पहचान) और प्रोफाइलिंग टैक्नोलॉजी की मदद से हर दिन ट्रैक किया जा रहा है। इन डाटा का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए होता है। इसके अलाव मार्केटिंग में भी इस डाटा का इस्तेमाल किया जाता है। 2022 नॉर्टन साइबर सेफ्टी इनसाइट्स रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे में शामिल पांच में से चार भारतीयों (82 फीसदी) का मानना है कि वे अपनी ऑनलाइन निजता के लिए पहले के मुकाबले कहीं अधिक जागरूक हैं और 86 फीसदी लोग अपनी निजता को सुरक्षित रखने के लिए और भी चीजें करना चाहते हैं। करीब आधे लोगों (47 फीसदी) का मानना है कि निजता को सुरक्षित रखना असंभव है। नॉर्टन लैब्स रिसर्च से पता चलता है कि इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि सप्ताह के अंत में आपका सामना कितने ट्रैकर्स से होता है, उनमें से ज़्यादातर आपके बारे में ब्राउज़िंग के कुछ ही घंटों में जान जाते हैं।