Online Hacking: हैकर्स को कैसे पता चलता है आपका फोन हैक हो सकता है या नहीं ? जानें इससे बचने के उपाय

डिजिटल वर्ल्ड में हैकिंग की घटनाएं अब आम हो गई हैं। आए दिन हम ऑनलाइन हैकिंग और इससे जुड़ी खबरें देखते हैं। दुनियाभर में 5 अरब लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, ऐसे में हैक हो सकने वाले डिवाइस का पता लगाना कोई आसान काम नहीं है। तो हैकर्स को कैसे पता चलता है आपका फोन हैक हो सकता है या नहीं? या फिर इतने सारे इंटरनेट यूजर्स में से हैकर्स कैसे अपना शिकार चुनते हैं? यदि आप भी हैकिंग की प्रोसेस जानना चाहते हैं तो यह रिपोर्ट आपके लिए है। इस रिपोर्ट में हम आपको हैकिंग से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें बताएंगे, जो आपको जानकारी के साथ भविष्य में ऑनलाइन हैकिंग से भी बचाएंगी। चलिए जानते हैं।

हैकर्स वल्नरेबल डिवाइस को कैसे खोजते हैं?
Cisco की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में 5 अरब लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। लेटेस्ट अनुमान के अनुसार 2023 तक दुनियाभर में 29 अरब डिवाइस (जैसे लैपटॉप, टेबलेट, स्मार्टफोन, वॉच आदि) इंटरनेट से कनेक्ट हो जाएंगे। ये आंकड़ा दुनिया की जनसंख्या के तीन गुना से भी ज्यादा है। यानी की एक व्यक्ति औसतन चार डिवाइस इस्तेमाल करेगा। इन डिवाइस का अपना एक अलग आईपी ( IP) एड्रेस होता है। यानी कि आईपी एड्रेस से इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सर्च इंजन का उपयोग करके किसी डिवाइस के बारे में बहुत सारी जानकारी प्राप्त करना संभव है।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सर्च इंजन
इंटरनेट ऑफ थिंग्स वह तकनीक है जिससे कई गैजेट्स को नेटवर्किंग के माध्यम से एक साथ जोड़ा जा सकता है। इसमें सभी गैजेट्स एक साथ जुड़कर एक दूसरे को डाटा का आदान-प्रदान करते हैं, जिससे सभी उपकरणों के बीच इंटीग्रेशन आता है। स्पेशलाइज IoT सर्च इंजन जैसे Rapid7 और MITRE विशिष्ट उपकरणों के लिए वल्नरेबिलिटी ट्रैक करते हैं। Shodan और ZoomEye जैसे सर्च इंजन का उपयोग करके भी हैकर्स इंटरनेट, जियोलोकेशन, पोर्ट/ऑपरेटिंग सिस्टम, सर्विसेज/होस्ट और आईपी एड्रेस से जुड़े डिवाइस ढूंढ सकते हैं। वे यह भी जांच सकते हैं कि क्या वे सिस्टम डिफॉल्ट लॉगिन पासवर्ड का उपयोग करते हैं। इन सब टूल से मिले डाटा को मिलाने से हैकर्स को इंटरनेट पर कमजोर डिवाइस खोजने और सबसे प्रभावी हमले की योजना बनाने में मदद मिलती है।