AI In Cyber Attacks: क्या एआई से हो सकते हैं साइबर हमले? जानिए कैसे यह तकनीक बन सकती है दोधारी तलवार
AI Used In Cyber Attack:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुनिया को नई दिशा दे रहा है, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा को लेकर नए खतरे भी सामने आ रहे हैं। AI का इस्तेमाल सिर्फ सुरक्षा बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि साइबर अटैक करने के लिए भी किया जा सकता है। आइए जानते हैं कैसे।

आज एआई से इंसानों द्वारा किए जाने वाले हर काम को आसान और तेज बनाने की कोशिश की जा रही है। मशिन लर्निंग और एडवांस लार्ज लैंग्वेज मॉडल ( LLM) से एआई में इंसानों जैसे सोचने, समझने और जवाब देने की क्षमताएं विकसित की जा रही है। एआई टूल्स के इस्तेमाल से प्रोफेशनल तौर पर लोग ज्यादा प्रोडक्टिव भी बन रहे हैं। हालांकि, अन्य कई तकनीकों के तरह ही एआई भी गलत इस्तेमाल से नहीं बचा है। हाल ही में एआई कंपनी Anthropic पर हुए साइबर हमले में एआई के उपयोग ने इसके नुकसान को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
एआई अब दोधारी तलवार बन चुका है जो आम लोगों के लिए तो फायदेमंद साबित हो रहा है, लेकिन साइबर हमलों को और भी तेज और सटीक बनाया जा रहा है। साइबर हमलों में एआई के इस्तेमाल ने इसे खतरनाक बना दिया है। आइए जानते हैं एआई के उपयोग से कैसे साइबर हमलों को अंजाम दिया जा रहा है।

AI-जनित फिशिंग हमले
फिशिंग अभी तक ईमेल या मैसेज के जरिए लोगों को धोखा देने तक सीमित था। लेकिन AI ने इसे और खतरनाक बना दिया है। AI किसी व्यक्ति की लिखने की शैली, सिन्नेचर या हैंडराइटिंग कॉपी कर सकता है। यह बेहद भरोसेमंद ईमेल, व्हाट्सएप मैसेज या सोशल मीडिया टेक्स्ट तैयार कर सकता है। लोग नकली मैसेज को असली समझकर फेक लिंक पर क्लिक कर देते हैं और उनकी निजी जानकारी चोरी हो जाती है।

डीपफेक के जरिए ठगी
AI आधारित डीपफेक तकनीक आवाज और चेहरा इतनी सटीकता से कॉपी कर सकता है कि असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। डीपफेक के कई ऐसे मामले आए हैं जहां कंपनी के CEO की नकली आवाज बनाकर कर्मचारियों को पेमेंट करने को कहा जाता है। वीडियो कॉल पर भी फर्जी पहचान दिखाकर फाइनेंशियल फ्रॉड किया जा सकता है। यह तरीका दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है।