Whale Phishing Scam: कैसे काम करता है व्हेल फिशिंग स्कैम, बचाव के लिए इन आसान टिप्स को जान लीजिए

तकनीकी बाजार में कई तरह के एडवांस डिवाइस और एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी का बढ़ता दायरा लोगों के काफी सारे काम को आसान बना रहा है। एक तरफ जहां पर इनकी वजह से लोगों को काफी सुविधा हो रही है। वहीं, दूसरी तरफ, बढ़ती तकनीक की वजह से लोगों पर खतरा भी बढ़ रहा है। जी हां, इन दिनों व्हेल फिशिंग स्कैम काफी प्रचलित हैं। साइबर अपराध की यह नई तकनीक क्या है और किस तरह से काम करता है। साथ ही इस नए साइबर खतरे से कैसे बचा जा सकता है।

व्हेल फिशिंग स्कैम एक सोशल इंजीनियरिंग अटैक है, जिसमें सबसे पहले साइबर अपराधी अपने टारगेट को तलाशते हैं और उस पर खोजबीन करते हैं। साइबर अटैकर्स अपने टारगेट की पर्सनल और प्रोफेशनल जानकारी को भी खोजते हैं। साइबर स्कैमर्स इसके लिए लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट्स की मदद लेते हैं।

साइबर स्कैमर्स अपने शिकार की पहचान और सारी जानकारी जुटाने के बाद उस पर हमला करते हैं। इसके लिए वह अक्सर किसी फोन कॉल या मैसेज का सहारा लेते हैं। स्कैमर्स लोगों को जाल में फंसाने के लिए उनसे वित्तीय सहायता और संवेदनशील जानकारी की मांग करते हैं। अगर लोग इनकी बातों में आकर मांगी गई जानकारी दे देते हैं तो फिर स्कैमर्स लोगों को ठगते हैं। साइबर स्कैमर्स लोगों से इस तरह से बात करते हैं कि उनका भरोसा जीत लिया जाए और इसके बाद अपना काम किया जाए।