इंडोनेशिया में 16 से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन: आज से लागू हुआ नियम, जानें क्या होगा असर?

Jagriti
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीJagriti
Sat, 28 Mar 2026 05:27 PM IST
सार

Indonesia Social Media Ban

: इंडोनेशिया सरकार ने आज से देश के लगभग 7 करोड़ बच्चों को सोशल मीडिया और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स से प्रतिबंधित कर दिया है। इस सख्त नियम का उद्देश्य बच्चों को साइबरबुलिंग, ऑनलाइन स्कैम और डिजिटल एडिक्शन जैसे गंभीर खतरों से सुरक्षित रखना है।

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Social Media Ban: Indonesia Limits Access Kids Under 16 Today
सोशल मीडिया बैन - फोटो : amarujala.com

    Indonesia Digital Safety Law for Children:

    डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए इंडोनेशिया ने शनिवार यानी 28 मार्च 2026 से नया नियम लागू कर दिया है। इस नियम के तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों को कई लोकप्रिय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने से रोक दिया जाएगा। इस फैसले के साथ इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला देश बन गया है, जिसने इस तरह का सख्त कदम उठाया है। संचार और डिजिटल मामलों की मंत्री मेउत्या हफीद के अनुसार, यह प्रतिबंध उन प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगा जहां बच्चों के शोषण या हानिकारक कंटेंट का जोखिम सबसे अधिक है। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे देश में लागू किया जाएगा।

    गुजरात हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भेजा नोटिस
    गुजरात हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भेजा नोटिस - फोटो : एआई जनरेटेड

    YouTube and Instagram Ban Indonesia: कौन से प्लेटफॉर्म्स होंगे प्रभावित?

    इंडोनेशिया ने उन सभी उच्च जोखिम वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को प्रतिबंधित किया है जहां अजनबियों से संपर्क आसान है। इनमें

    वीडियो व सोशल:

    यूट्यूब, टिकटॉक, फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्रेड शामिल है।

    माइक्रोब्लॉगिंग व लाइव:

    एक्स (Twitter), बीगो लाइव पर प्रतिबंध लगाया गया है।

    गेमिंग

    : रोब्लॉक्स को भी बैन कर दिया गया है।

    आंध्र प्रदेश में 90 दिनों में बच्चों के लिए बैन हो जाएगा सोशल मीडिया
    आंध्र प्रदेश में 90 दिनों में बच्चों के लिए बैन हो जाएगा सोशल मीडिया - फोटो : Freepik

    कितने बच्चों पर होगा असर?

    इंडोनेशिया सरकार के इस फैसले से 28 करोड़ की आबादी में से करीब 7 करोड़ बच्चे इस कानून के दायरे में आएंगे। सरकार का मानना है कि इससे परिवारों को टेक कंपनियों से वापस नियंत्रण हासिल करने में मदद मिलेगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम बच्चों में चिंता और डिप्रेशन को कम करने में सहायक होगा।

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