KYC Fraud: साइबर अपराधी कैसे करते हैं केवाईसी फ्रॉड, बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

साइबर अपराधियों का ठगी करने का सबसे आम और पुराना हथकंडा है केवाईसी। बीते कुछ सालों के दौरान केवाईसी फ्रॉड के कई सारे मामले सामने आए हैं। केवाईसी यानी नो यूर कस्टमर के जरिए साइबर अपराधी लोगों के साथ बड़ा आर्थिक फ्रॉड कर देते हैं और जब तक लोगों को समझ आता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। काफी लोगों को केवाईसी फ्रॉड के बारे में जानकारी भी होती है, मगर फिर भी वे साइबर अपराधियों की बातों में आ जाते हैं और ठगी का शिकार हो जाते हैं।

साइबर अपराधी केवाईसी फ्रॉड के जरिए लोगों की पर्सनल जानकारी जैसे- पहचान, घर का पत्ता और कई बार कुछ संवेदनशील जानकारी की भी मांग करते हैं। केवाईसी अपराधी अक्सर इस फ्रॉड के लिए पहले अपने शिकार की तलाश करते हैं। केवाईसी फ्रॉड में साइबर अपराधी लोगों की पर्सनल जानकारी, बैंकिंग डिटेल, महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जानकारी, अहम लॉगइन डिटेल और कुछ संवेदनशील डिटेल भी हासिल करने की कोशिश करते हैं। इसके लिए फिशिंग ईमेल, फेक मैसेज, कॉल और फर्जी वेबसाइट का सहारा लेते हैं।

साइबर अपराधी केवाईसी फ्रॉड के लिए कॉल, मैसेज फिशिंग ईमेल और नकली वेबसाइट की भी मदद लेते हैं। जालसाज लोगों को किसी कंपनी का अधिकारी, बैंक अधिकारी या फिर किसी संस्था का सदस्या बनकर लोगों को अपनी बातों में फंसाते हैं। इसके बाद उनसे पर्सनल जानकारी के अलावा कई तरह की डिटेल लेने का प्रयास करते हैं। कई बार साइबर अपराधी किसी नकली मोबाइल एप की भी मदद लेते हैं, जो पूरी तरह से फर्जी होता है। इसके अलावा कई मामलों में फिशिंग लिंक के जरिए डिवाइस में मैलवेयर इंस्टाल करवाते हैं और फिर डिवाइस की सारी जानकारी को चोरी कर लेते हैं।