क्या सच में गत्ते में ले जाए गए नक्सली हमले में शहीद हुए जवानों के शव?

सोशल मीडिया पर गत्ते में लिपटे हुए शवों की दो तस्वीरें इस दावे के साथ शेयर की जा रही हैं कि ये महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में माओवादी हमले में शहीद हुए पुलिस के जवानों के शव हैं। फेसबुक और ट्विटर समेत शेयर चैट के भी कुछ ग्रुप्स में इन तस्वीरों को इसी दावे के साथ शेयर किया गया है। मोदी सरकार के आलोचक के तौर पर पहचान रखने वाले ग्रुप्स में इन तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा गया है, "ये कूड़े के डब्बे नहीं हैं। ये गढ़चिरौली में हुए माओवादी हमले में मारे गए सीआरपीएफ जवानों के शव हैं। देखिए खुद को राष्ट्रवादी कहने वाली बीजेपी सरकार हमारे सैनिकों के साथ कैसा सुलूक करती है।"

बता दें कि महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में बुधवार को एक माओवादी हमला हुआ था जिसमें सुरक्षा बलों के 15 जवानों और एक ड्राइवर की मौत हो गई थी। माओवादियों ने सुरक्षा बलों के एक वाहन को बारूदी सुरंग के जरिये निशाना बनाया था। ये जवान महाराष्ट्र पुलिस के सी-60 कमांडोज थे। जिन लोगों ने सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को शेयर किया है, उन्होंने लिखा है कि जवानों की ऐसी हालत के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। लेकिन अपनी पड़ताल में हमने पाया कि ये तस्वीरें महाराष्ट्र की नहीं है और इनके साथ जो दावे किये गए हैं वो गलत हैं।

गढ़चिरौली की घटना
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में माओवादी हमले में मारे गए पुलिस के जवानों को राजकीय सम्मान दिया गया था। कई मीडिया संस्थानों ने मारे गये जवानों की श्रद्धांजलि सभा को लाइव टेलिकास्ट भी किया था। जवानों की श्रद्धांजलि सभा की तस्वीरें यह साफ़ करती हैं कि सोशल मीडिया पर जवानों के शव के साथ बुरा सुलूक किये जाने का दावा गलत है। अगली स्लाइड में जानें वायरल तस्वीरों का सच