ग्रीनलैंड विवाद: डेनमार्क की जनता का ऑनलाइन स्ट्राइक, मोबाइल एप की मदद से कर रहे अमेरिकी सामानों का बहिष्कार
Greenland-Trump Dispute:
ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बाद डेनमार्क और पड़ोसी यूरोपीय देशों में अमेरिकी उत्पादों के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा है। वहां के नागरिक अब मोबाइल एप्स का सहारा लेकर अमेरिकी सामानों की पहचान कर रहे हैं और उनका कड़ा बहिष्कार कर रहे हैं।

डेनमार्क के नागरिकों ने अमेरिका के खिलाफ एक अनोखा मोर्चा खोल दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा डेनमार्क के क्षेत्र 'ग्रीनलैंड' पर नियंत्रण करने की धमकियों के बाद पूरे यूरोप के लोगों में गुस्सा है। ट्रंप का विरोध करने के लिए अब डेनमार्क के लोगों ने अमेरिकी सामानों का बहिष्कार शुरू कर दिया है। वहां ने नागरिकों ने अमेरिकी सामानों के खिलाफ ऑनलाइन मोर्चा खोल दिया है। अमेरिकी सामानों की पहचान के लिए वह ऐसे एप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो ये आसानी से बता देते हैं कि सामान कहां बना है और उसे बनाने वाली कंपनी किस देश की है।

अचानक बढ़े एंटी-अमेरिका एप के डाउनलोड
डेनमार्क के एप स्टोर पर अचानक ऐसे मोबाइल एप्स की बाढ़ आ गई है जो लोगों को यह पहचानने में मदद करते हैं कि कौन सा सामान अमेरिका में बना है और उसके स्थानीय विकल्प क्या हो सकते हैं। यह बहिष्कार न केवल डेनमार्क बल्कि ग्रीनलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और आइसलैंड जैसे देशों में तेजी से फैल रहा है। अनुमान है कि इससे यूरोप में अमेरिकी सामानों की बिक्री कम होगी और डेनिश निर्माताओं की बिक्री बढ़ेगी।

बारकोड स्कैन कर पहचान रहे अमेरिकी सामान
इस विरोध प्रदर्शन के बीच NonUSA और Made O’Meter जैसे एप्स रातों-रात लोकप्रिय हो गए हैं। NonUSA एप बुधवार को डेनमार्क के एप स्टोर पर नंबर-1 पायदान पर पहुंच गया, जो कि कुछ ही दिन पहले 400 से भी नीचे था। इस एप की खासियत यह है कि यूजर किसी भी सामान के बारकोड को स्कैन करके तुरंत जान सकते हैं कि वह उत्पाद अमेरिका का है या नहीं। यदि सामान अमेरिकी निकलता है, तो एप तुरंत उसके बदले डेनमार्क में बने स्थानीय विकल्पों की सूची दिखा देता है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में इन एप्स के डाउनलोड में 867% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो यह दर्शाता है कि लोग तकनीक का इस्तेमाल अपने विरोध को प्रभावी बनाने के लिए कर रहे हैं।
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