आचार्य चाणक्य को अर्थशास्त्र का मर्मज्ञ होने के कारण विष्णु गुप्त और कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता था। इन्होंने नंद वंश का नाश कर चंद्रगुप्त को गद्दी पर बिठाकर इतिहास की दिशा को एक नया मोड़ दिया। ये एक कुशल कूटनीतिज्ञ, राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री थे। इनके द्वारा कई राजनीतिशास्त्र, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र समेत कई महत्वपूर्ण शास्त्र लिखे गए। जिसमें से इनके द्वारा लिखे गए नीतिशास्त्र की बातें आज भी लोकप्रिय हैं। नीति शास्त्र में जीवन को सरल और सुगम बनाने वाली नीतियों का वर्णन किया है। आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में ऐसे सात लोगों को बारे में बताया है जिन्हें कभी भूलकर भी पैर नहीं लगाना चाहिए। यदि भूलवश पैर लग भी जाए तो तुरंत क्षमा मांग लेनी चाहिए।
Chanakya niti: इन सात लोगों को धोखे से भी लग जाए पैर तो तुरंत मांगे क्षमा, अन्यथा बनेंगे पाप के भागी
अग्नि
आचार्य चाणक्य के अनुसार अग्नि पर भूलकर भी पैर नहीं लगाना चाहिए। यदि अग्नि पर पैर लगाते हैं तो स्वयं का ही नुकसान होता है। इसके अलावा सनातन धर्म में अग्नि को देवता माना जाता है। हिंदू धर्म में विवाह और अन्य शुभ कार्य भी अग्नि को साक्षी मानकर किए जाते हैं। इसलिए यदि अग्नि पर भूलवश पैर लग भी जाए तो तुरंत क्षमा मांग लेनी चाहिए।
कुंवारी कन्या
चाणक्य नीति के अनुसार, कभी भी कुंवारी कन्या को पैर नहीं लगाना चाहिए। कन्या को देवी का स्वरूप माना जाता है। यदि गलती से कुंवारी कन्या को कभी भी पैर लग भी जाए तो क्षमा मांग लेनी चाहिए।
गुरु
हर व्यक्ति के जीवन में गुरू का स्थान बहुत महत्वपूर्ण होता है। गुरू ही व्यक्ति को जीवन की सही राह दिखाता है। गुरू के बिना मनुष्य का जीवन अंधकारमय हो जाता है। चाणक्य नीति कहती है कि गुरू को कभी पैर नहीं लगाना चाहिए। यदि गलती से पैर लग भी जाए तो तुरंत क्षमा मांगनी चाहिए। गुरू का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है। अपने गुरू का सदैव सम्मान करना चाहिए।
शिशु
एक शिशु अबोध होता है। उसे ईश्वर का स्वरूप माना जाता है। चाणक्य कहते हैं कि कभी भी यदि छोटे बच्चे या शिशु को पैर लग जाए तो तुरंत क्षमा प्रार्थी होना चाहिए अन्यथा व्यक्ति पाप का भागीदार बनता है।