आचार्य चाणक्य कुशाग्र बुद्धि के एक श्रेष्ठ विद्वान थे। ये चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। इन्होंने अपनी नीतियों और बुद्धि को बल पर चंद्रगुप्त को एक साधारण बालक से सम्राट बनाने में महत्पूर्ण भूमिका निभाई। आचार्य चाणक्य राजनीति शास्त्र, समाज शास्त्र और अर्थशास्त्र समेत कई विषयों में परांगत थे। इन्होंने विश्वप्रसिद्धि तक्षशिला विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की और यही पर आचार्य रहते हुए विद्यार्थियों के शिक्षा भी प्रदान की। आचार्य चाणक्य के द्वारा लिखे गए नीति शास्त्र में लिखी नीतियों जीवन से जुड़े हर पहलू को स्पर्श करती हैं। आचार्य चाणक्य की नीतियां लोगों को बहुत कठिन लगती हैं लेकिन ये मनुष्य को जीवन की सत्यता से अवगत कराती हैं। कुछ परिस्थितियों में चाणक्य ने माता-पिता, पति-पत्नी और संतान को भी शत्रु बताया है। जानते हैं कि कौन सी हैं वे परिस्थितियां।
चाणक्य नीति: इन परिस्थितियों में माता-पिता, पति-पत्नी और संतान भी बन जाते हैं शत्रु
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Thu, 27 May 2021 06:59 AM IST
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