अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखे जाने वाले वट सावित्रि व्रत का पूजन इस शुभ मुहूर्त में करें। आगे जानिए कैसे करें पूजन...
ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेंद्र नैनवाल ने बताया कि, सावित्री अपने पति सत्यभामा के प्राण यमराज से वापस ले आई थी। इसलिए इस दिन मां सावित्री का ध्यान कर वट वृक्ष की पूजा की जाती है। यह व्रत और पूजा पति की लंबील उम्र के लिए किया जाता है। मंगलवार को यह पूजा की जाएगी।
इस बार अमावस्या तिथि 14 मई 2018 सोमवार शाम 07:46 बजे से शुरू होगी जो कि15 मई 2018 यानी बुधवार शाम 05:17 बजे तक समाप्त होगी। इस तिथि में आप वट पूजा कर सकते हैं। इस तिथि में पूजा करना शुभ होगा। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को रखने से वैवाहिक जीवन में आने वाले सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और हमेशा सुख शांति बनी रहती है।
पूजा के लिए सबसे पहले घर की सफाई कर कर स्नान करें। इस दिन गंगा स्नान करेंगे तो बेहद शुभ माना जाता है। इसके बाद घर में गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद आप किसी भी बर्तन में धान रखकर दिया जलाएं और जल से भरे लोटे की पूजा करें। इस दिन व्रत भी रखा जाता है। पूजा करने के बाद ही कुछ खाएं।
इस दिन ब्रह्मा जी की पूजा करें। मूर्ति के बाएं भाग में सावित्री की मूर्ति स्थापित करें। जल के लोटे में वट की टहनी रखें या वृक्ष की पूजा करें। वृक्ष की पूजा न कर पाएं तो टहनी भी ला सकते हैं। इस पर सात घेरे कच्चे सूत या कलावे के लगाए।