शीतला अष्टमी का पर्व हिंदू धर्म में विशेष श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इसे बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है और यह होली के बाद आने वाली अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मां शीतला की पूजा करके परिवार के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत और पूजा से चर्म रोग और संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है। शीतला माता की कृपा पाने के लिए इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है। आइए जानते हैं शीतला अष्टमी के दिन क्या करें और क्या न करें:
Sheetala Ashtami 2025: शीतला अष्टमी पर बरसेगा आशीर्वाद, जानिए क्या करें, क्या न करें और पूजा की सही विधि
शीतला माता की कृपा पाने के लिए इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है। आइए जानते हैं शीतला अष्टमी के दिन क्या करें और क्या न करें:
क्या करें:
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शीतला माता की पूजा करें
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शीतला माता की मूर्ति या चित्र की विधिपूर्वक पूजा करें। माता को पुष्प, रोली, अक्षत और सुगंधित जल अर्पित करें।
- बासी भोजन का भोग लगाएं
इस दिन ताजा भोजन पकाने की मनाही होती है। एक दिन पहले बनाए गए ठंडे और बासी भोजन का भोग शीतला माता को लगाएं। पूजा के बाद यही भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
- घर की सफाई करें
शीतला माता स्वच्छता की प्रतीक मानी जाती हैं। इस दिन घर की साफ-सफाई करके शुद्ध वातावरण बनाएं। इससे बीमारियां और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैं।
- शीतल जल से स्नान करें
शीतलता और शुद्धता का प्रतीक शीतला अष्टमी के दिन ठंडे जल से स्नान करना शुभ माना जाता है। इससे शरीर और मन दोनों शांत होते हैं।
- शांति और संयम बनाए रखें
मन को शांत रखें और क्रोध से बचें। व्रत रखने वाले को संयम का पालन करना चाहिए। शांति से पूजा करने से माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- पीपल के पेड़ की पूजा करें
शीतला माता के साथ-साथ पीपल के पेड़ की पूजा करने का भी विशेष महत्व है। पीपल के नीचे दीपक जलाएं और शीतला माता से परिवार के स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करें।
क्या न करें:
- अग्नि का उपयोग न करें
शीतला अष्टमी के दिन घर में चूल्हा जलाना वर्जित होता है। इस दिन एक दिन पहले बना हुआ भोजन ही खाया जाता है।
- ताजा भोजन न बनाएं
इस दिन ताजा भोजन पकाना और गर्म खाना खाना निषेध होता है। ठंडा और बासी भोजन ही माता को भोग में अर्पित किया जाता है।
- क्रोध और वाद-विवाद से बचें
इस दिन मन को शांत रखें और किसी से बहस या विवाद करने से बचें। शांतिपूर्ण माहौल से माता की कृपा प्राप्त होती है।
- गंदगी न फैलाएं
स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। घर और आसपास के वातावरण को साफ रखें। गंदगी से बीमारियां फैलती हैं, जो शीतला माता को अप्रिय है।
- कटाई-छंटाई से बचें
शीतला अष्टमी के दिन बाल कटवाना, नाखून काटना या शेविंग करना अशुभ माना जाता है।
- बीमारों की उपेक्षा न करें
यदि कोई व्यक्ति बीमार है तो उसकी सहायता करें। शीतला माता से उनके स्वास्थ्य की कामना करें और सेवा भाव अपनाएं।
विशेष मान्यता
यह मान्यता है कि जो व्यक्ति शीतला अष्टमी के दिन सच्चे मन से व्रत रखकर माता की पूजा करता है, उसे रोग, महामारी और अन्य संकटों से मुक्ति मिलती है। इस दिन पूरी, गुड़, चावल, दही और हलवा का भोग विशेष रूप से शीतला माता को अर्पित किया जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।