Yogini ekadashi 2021: इस दिन है योगिनी एकादशी, जानिए तिथि, महत्व, पूजा विधि व एकादशी व्रत नियम
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हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में दोनों पक्षो कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में एकादशी का व्रत किया जाता है। इस तरह से एक माह में दो और एक वर्ष में 24 एकादशी की तिथियां पड़ती हैं। शास्त्रों में एकादशी तिथि के व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठ बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो मनुष्य श्रद्धा पूर्वक हर एकादशी का व्रत करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। व्यक्ति के पापकर्म नष्ट होते हैं और इस लोक के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रत्येक एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित किया जाता है परंतु हर एकादशी का अपना एक अलग महत्व माना गया है। आषाढ़ माह में कृष्ण पक्ष के दौरान योगिनी एकादशी पड़ती है। यह एकादशी दो महत्वपूर्ण एकादशी व्रतों के मध्य, निर्जला के पश्चात व देवशयनी एकादशी से पहले पड़ती है। इस बार योगिनी एकादशी का व्रत 05 जून 2021 सोमवार को किया जाएगा। योगिनी एकादशी का महातम्य तीनों लोकों में माना गया है। इस दिन व्रत करने से मनुष्य को सुख-समृद्धि और अच्छा स्वास्थय प्राप्त होता है। तो आइए जानते हैं योगिनी एकादशी का महत्व पूजा विधि शुभ मुहूर्त व व्रत नियम।
भगवान श्रीकृष्ण इस एकादशी का महातम्य बताते हुए कहते हैं कि योगिनी एकादशी का व्रत नियम और निष्ठा के साथ करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान फल की प्राप्ति होती है। इसके अलावा पौराणिक मान्यता के अनुसार कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति यदि पूरी श्रद्धा व नियम के साथ योगिनी एकादशी का व्रत करता है तो इस रोग से मुक्ति प्राप्त होती है। योगिनी एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है। जीवन में सुखों की प्राप्ति होती है व इस लोक के बाद मनुष्य को बैकुंठधाम की प्राप्ति होती है।
योगिनी एकादशी व्रत व पारण का मुहूर्त-
योगिनी एकादशी व्रत 05 जुलाई दिन सोमवार को किया जाएगा।
आषाढ़ कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि आरंभ- 04 जुलाई 2021 दिन सोमवार शाम को 07 बजकर 55 मिनट पर
आषाढ़ कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि समाप्त- 05 जुलाई 2021 दिन मंगलवार रात 10 बजकर 30 मिनट पर
एकादशी व्रत पारण (व्रत खोलना) का समय- 06 जुलाई 2021 बुधवार सुबह 05 बजकर 29 मिनट से सुबह 08 बजकर 16 मिनट पर
द्वादशी समाप्त होने का समय- 06 जुलाई देर रात्रि 01 बजकर 02 मिनट पर यानी 07 जुलाई आरंभ हो जाएगी।
- इस दिन प्रातः काल उठकर स्नानादि करने के पश्चात स्वच्छ, हो सके तो पीले वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प करें व धूप दीप प्रज्वलित करें।
- विधि-विधान से भगवान विष्णु का पूजन करें और एकादशी व्रत का महातम्य पढ़े या श्रवण करें।
- महातम्य पूर्ण हो जाने के बाद भगवान विष्णु की आरती करें व भगवान विष्णु की स्मरण करते हुए व्रत रखें।
- अगले दिन द्वादशी तिथि को प्रातः स्नानादि करने के पश्चात पुनः पूजन करें। किसी ब्राह्मण व जरुरतमंद को भोजन करवाकर दान दक्षिणा दें।
- एकादशी व्रत के नियम दशमी तिथि से आरंभ होकर द्वादशी तिथि तक चलते हैं।
- एकादशी व्रत में किसी भी प्रकार से अन्न का सेवन वर्जित है इसलिए दशमी तिथि को सूर्यास्त के पश्चात भोजन न करें ताकि अगले दिन पेट में अन्न का अंश न रहे।
- एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि पर विष्णु जी को भोग लगाने व ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद पारण किया जाता है।
- व्रत पारण करने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि हरि वासर समाप्त होने के बाद व द्वादशी समाप्त होने से पहले व्रत का पारण कर लेना चाहिए।
- द्वादशी समाप्त होने के बाद एकादशी व्रत का पारण करना पाप के समान बताया गया है लेकिन जिस दिन द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाए उस दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है।