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Shiv Puja Rules: शिव पूजा में क्यों नहीं बजाया जाता है शंख? जान लें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता
Tue, 02 Jun 2026 02:10 PM IST
Shikhar Baranawal
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shikhar Baranawal
Updated Tue, 02 Jun 2026 02:10 PM IST
सार
Why Shankh Is Forbidden In Shiva Puja: हिंदू धर्म में अधिकतर देवी-देवता के पूजा-पाठ में शंख को पवित्र माना जाता है। मगर बहुत कम लोगों को मालूम है कि भगवान शिव की पूजा में शंख को वर्जित माना जाता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
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भगवान शिव की पूजा में शंख क्यों नहीं बजाते हैं?
- फोटो : AI
Why Shankh Water Is Not Offered To Shiva: हिंदू धर्म में लगभग हर देवी-देवता की पूजा में शंख बजाना और उससे जल अर्पित करना बेहद शुभ और अनिवार्य माना जाता है। मगर महादेव यानी भगवान शिव की पूजा का नियम इससे बिल्कुल अलग है। शिवजी की आराधना में भूलकर भी न तो शंख बजाया जाता है और न ही उन्हें शंख से जल चढ़ाया जाता है।
शंखचूड़ वध की पौराणिक कथा और मान्यता
- फोटो : Adobe Stock
शंखचूड़ वध की पौराणिक कथा और मान्यता
- प्राचीन काल में शंखचूड़ नाम का एक पराक्रमी और अत्याचारी असुर था, जिसने अपनी शक्तियों के बल पर तीनों लोकों पर कब्जा कर लिया था और देवताओं को परेशान करता था।
- देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से असुर शंखचूड़ का वध करके संसार को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी।
- मान्यता है कि शंखचूड़ के भस्म होने के बाद उसकी हड्डियों और राख से ही 'शंख' की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए इसे शिव पूजा में वर्जित माना गया।
भगवान विष्णु का भक्त और शंख का महत्व
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भगवान विष्णु का भक्त और शंख का महत्व
- असुर शंखचूड़ अपने पिछले जन्म में भगवान विष्णु का परम भक्त था, इसलिए उसकी भस्म से बने शंख को विष्णु जी ने अपनी पूजा में विशेष स्थान दिया।
- शंख को देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय माना जाता है, यही वजह है कि इसे सभी मांगलिक कार्यों और श्रीहरि की पूजा में बजाया जाता है।
- चूंकि शिवजी ने शंखचूड़ का संहार किया था, इसलिए उसके प्रतीक यानी शंख से शिवजी का अभिषेक करना वर्जित है।
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शिव पूजा के अन्य जरूरी नियम
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शिव पूजा के अन्य जरूरी नियम
- शिवजी को जल चढ़ाने के लिए हमेशा तांबे या पीतल के पात्र का ही इस्तेमाल करें, शंख का भूलकर भी प्रयोग न करें।
- शंख की तरह ही शिव पूजा में तुलसी की पत्तियां चढ़ाना भी वर्जित माना जाता है, क्योंकि तुलसी पूर्वजन्म में शंखचूड़ की पत्नी वृंदा थीं।
- महादेव की पूजा में केतकी के फूल का इस्तेमाल भी नहीं किया जाता है, इन्हें पूजा से हमेशा दूर रखना चाहिए।
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पूजा के समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- फोटो : freepik
पूजा के समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- जब भी घर या मंदिर में पूजा करें, शिवलिंग के आसपास की जगह को पूरी तरह साफ और पवित्र रखें।
- शंख बजाने के बजाय शिव पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का शांत मन से जाप करना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है।
- भले ही शिवजी पर शंख का उपयोग न हो, लेकिन घर के कोने में शंख रखने से वहां की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।