Tulsi Mala Wearing Rules: सनातन धर्म में तुलसी को हर रूप में शुभ माना जाता है। लोग रोजाना तुलसी के पौधे को न केवल जल अर्पित करते हैं, बल्कि इसे माला के रूप में भी पहनते हैं। तुलसी का पौधा अपने औषधीय गुणों के लिए भी प्रसिद्ध है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, तुलसी का पौधा पवित्रता का प्रतीक है और यह श्री हरि विष्णु और देवी लक्ष्मी से संबंधित है। घरों में मुख्य रूप से श्याम तुलसी और राम तुलसी रखी जाती है, इन्हीं की माला पहनी जाती है। श्यामा तुलसी अपने नाम के अनुसार ही श्याम वर्ण की होती है तथा रामा तुलसी हरित वर्ण की होती है और दोनों ही तुलसी श्रेष्ठ है। तुलसी की माला के बारे में लोगों की विभिन्न मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि तुलसी की माला पहनने से सौभाग्य और समृद्धि प्राप्त होती है, साथ ही यह नकारात्मक ऊर्जाओं से भी रक्षा करती है।
Tulsi Mala Pahnne ke Niyam: क्या आप भी तुलसी की माला धरण करते हैं? जानें इससे जुड़े नियम और महत्व
Tulsi Mala Benefit: घरों में मुख्य रूप से श्याम तुलसी और राम तुलसी रखी जाती है, इन्हीं की माला पहनी जाती है। श्यामा तुलसी अपने नाम के अनुसार ही श्याम वर्ण की होती है तथा रामा तुलसी हरित वर्ण की होती है और दोनों ही तुलसी श्रेष्ठ है। तुलसी की माला के बारे में लोगों की विभिन्न मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि तुलसी की माला पहनने से सौभाग्य और समृद्धि प्राप्त होती है, साथ ही यह नकारात्मक ऊर्जाओं से भी रक्षा करती है।
तुलसी माला का महत्व
तुलसी माला का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। जो व्यक्ति तुलसी की माला को कंठ में धारण करके स्नान करता है, उसे सभी जल तीर्थों में स्नान का फल प्राप्त होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्री हरि विष्णु ने तुलसी को यह वरदान दिया कि वे केवल उसी भोग को स्वीकार करेंगे जिसमें तुलसी के पत्ते होते हैं। इसलिए, विष्णुजी केवल उन भोगों को ग्रहण करते हैं जिनमें तुलसी का समावेश होता है।
इसी प्रकार, जब श्री विष्णु के भक्तों के कंठ में तुलसी की माला होती है, तो भगवान उन्हें सहजता से स्वीकार करते हैं, अपनी शरण में लेते हैं और अपने लोक में उन्हें सुंदर स्थान प्रदान करते हैं। इसलिए, जो व्यक्ति भगवान विष्णु की शरण में जाना चाहता है, उसे तुलसी माला अवश्य धारण करनी चाहिए।
तुलसी माला का वैज्ञानिक महत्व
भारतीय सनातन संस्कृति व परंपरा पूर्णतया वैज्ञानिक है। हर सनातन मानता के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण भी छुपा रहता है। तुलसी माला धारण करने के पीछे आध्यात्मिक महत्व के साथ-साथ वैज्ञानिक महत्व भी हैं।
विज्ञान के विभिन्न परीक्षणों में सिद्ध हो चुका है कि तुलसी एक दिव्य पौधा है, तुलसी में एक खास प्रकार की विद्युत शक्ति होती है जिससे मन में शालीनता और पॉजिटिविटी आती है, गले में तुलसी धारण करने से जीवन शक्ति बढ़ती है और बहुत सी बीमारी दूर होती है।
इसके अलावा तुलसी माला पहनने से व्यक्ति को इन्फेक्शन, डाइजेशन, बुखार,जुकाम, सिरदर्द, स्किन इन्फेक्शन, दिमाग की बीमारियां और गैस से संबंधित अनेक बीमारियों से फायदा मिलता है। अतः तुलसी माला को प्रत्येक संप्रदाय और जाति-धर्म के लोग धारण कर सकते हैं।
तुलसी कंठी धारण करने की विधि
तुलसी माला को सर्वप्रथम गंगाजल में डाल कर शुद्ध कर लेना चाहिए, फिर धूप दीप दिखानी चाहिए। तत्पश्चात माला को श्रीहरि विष्णुजी के पास रखना चाहिए, भगवान की पूजा उपासना स्तुति करने के बाद माला को पूरी आस्था व श्रद्धा के साथ धारण करना चाहिए।
तुलसी माला पहनने के नियम
श्रीविष्णु भगवान में आस्था रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को तुलसी माला अवश्य धारण करनी चाहिए। लेकिन तुलसी की कंठी को धारण करने वाले व्यक्ति को कुछ नियमों का पालन भी करना चाहिए।
- तुलसी कंठी धारण करने वाले व्यक्ति को सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। तामसिक भोजन जैसे अण्डे- मांस इत्यादि से दूर रहना चाहिए है।
- किसी प्रकार का नशा नहीं करना चाहिए, शराब जैसे नशे से बिल्कुल दूर रहना चाहिए।
- तुलसी माला (कंठी) चारो आश्रम (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यासी) बच्चे स्त्री पुरुष,प्रत्येक जाति व संप्रदाय के सभी लोग धारण कर सकते हैं।
- मनुष्य जब मृत्यु शैया पर होता है तो अंत समय में आत्मा के कल्याण के लिए उसके मुख में तुलसी दल और गंगाजल डाला जाता है,इसी प्रकार जब कंठ में तुलसी की माला धारण की हुई होती है तो वह परम कल्याणकारी होती है। अतः तुलसी माला को अपने से दूर कभी नहीं करना चाहिए
- तुलसी माला कुछ विशेष पर्व काल के दौरान धारण करना विशेष शुभ माना गया है जैसे-: अक्षय तृतीया, दीपावली, होली, दशहरा, अनंत चतुर्दशी, एकादशी तिथि या शुक्ल पक्ष के गुरुवार को गंगाजल से शुद्ध करके धारण करना चाहिए।
- परिवार में जन्म तथा मृत्यु के अवसर पर भी कंठी को नहीं उतारना चाहिए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।