राजस्थान के जैसलमेर से करीब 120 किलोमीटर दूर भारत पाकिस्तान की सीमा के पास देवी का एक मंदिर स्थित है। इस मंदिर में निवास करती हैं 51 शक्तिपीठों में एक देवी हिंगलाज का स्वरूप मां तनोट।
भारत के इस सीमा की रक्षा करती है एक देवी, पाकिस्तान भी इनसे घबराता है
भारत पाकिस्तान के विभाजन के बाद माता हिंगलाज पाकिस्तान के हिस्से में रह गई। लेकिन उनका एक स्वरूप अपने भक्त की श्रद्धा और भक्ति के कारण भारत के हिस्से में आ गई। इस संदर्भ कथा इस प्रकार है।
भारत के इस सीमा की रक्षा करती है एक देवी, पाकिस्तान भी इनसे घबराता है
मामरिया नाम का एक चारण था जिसकी कोई संतान नहीं थी। संतान सुख की चाहत में इन्होंने पैदल ही कई बार देवी हिंगलाज की यात्रा की। इनकी भक्ति और श्रद्धा से प्रसन्न होकर देवी हिंगलाज ने स्वयं इनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया और चमत्कार दिखाना शुरु कर दिया।
भारत के इस सीमा की रक्षा करती है एक देवी, पाकिस्तान भी इनसे घबराता है
किशोरावस्था में देवी तनोट गांव में आकर बस गई। भाटी राजपूत नरेश तणुराव ने तनोट माता के मंदिर का निर्माण करवाया और इनकी मूर्ति स्थापित की। इस मंदिर के बारे में भक्तों की ऐसी श्रद्धा है कि देवी यहां प्रत्यक्ष निवास करती हैं और माता ने इसका सबूत भी दिया है।
भारत के इस सीमा की रक्षा करती है एक देवी, पाकिस्तान भी इनसे घबराता है
1965 में जब भारत पर पाकिस्तान ने हमला किया तो यहां पर 3000 से अधिक बम पाकिस्तान की ओर दागे गए। करीब 450 गोले तो मंदिर परिसर में गिरे। लेकिन माता ने ऐसा चमत्कार दिखाया कि पाकिस्तानी सैनिकों के होश उड़ गए।