दस सिरों वाले रावण के जीवन की 10 बड़ी पराजय
रावण की अंतिम हार भगवान श्री राम के हाथों हुई थी जिसमें उसकी मृत्यु हो गयी थी। लेकिन भगवान राम से पहले भी रावण को कई बार हार का सामना करना पड़ा था और इसका कारण सिर्फ यह था कि रावण अभिमान और अहंकार डूबा हुआ था। आइये देखें कि रावण के अहंकार ने उसे कब-कब हराया।
दस सिरों वाले रावण के जीवन की 10 बड़ी पराजय
सीता स्वयंवर में रावण भी भाग लेने आया हुआ था। रावण को अभिमान था कि उसके अलावा कोई नहीं है जो भगवान शिव के धनुष को उठा सके। लेकिन रावण को यहां हार का मुंह देखना पड़ा जब भगवान शिव का धनुष उससे हिला तक नहीं। अपमानित भाव से रावण स्वयंवर से लंका चला गया।
दस सिरों वाले रावण के जीवन की 10 बड़ी पराजय
अपने बल के अहंकार में आकर रावण वानर राज बालि से युद्ध करने पहुंचा। बालि उस समय पूजा कर रहे थे, रावण ने जब पूजा में बाधा डालना शुरु किया तो बालि ने रावण को अपने कांख में जकड़ लिया और चारों समुद्र की परिक्रमा करके सूर्य देवता को अर्घ्य दिया। पूजा पूरी होने के बाद बालि ने रावण को छोड़ दिया और पूछा तुम क्या चाहते हो। लज्जित होकर रावण ने बालि से क्षमा मांगी और वापस लंका चला गया।
दस सिरों वाले रावण के जीवन की 10 बड़ी पराजय
रावण भगवान शिव का परम भक्त था और चाहता था कि भोलेनाथ लंका में आकर निवास करें। जब भगवान शिव ने लंका में रहने से मना कर दिया तो अभिमान से भरा रावण कैलाश पर्वत समेत भगवान शिव को उठाकर लंका ले जाने का विचार करने लगा। रावण ने कैलाश पर्वत उखाड़ने के लिए जैसे ही पर्वत के नीचे हाथ लगाया भगवान शिव ने अपने पैर का अंगूठा जमीन पर टिका दिया। इससे रावण का हाथ पर्वत से दब गया और प्राण रक्षा के लिए भगवान शिव की स्तुति करने लगा। इसी समय रावण ने शिव तांडव स्तोत्र की रचना की थी।
दस सिरों वाले रावण के जीवन की 10 बड़ी पराजय
हजार हाथों वाले सहस्रबाहु से युद्ध करने रावण अपनी सेना लेकर चला। सहस्रबाहु को जब यह बात पता चली तो उसने अपने हजार हाथों से नर्मदा के जल के बहाव को रोक लिया और जब रावण की सेना नर्मदा के पास पहुंची तो उन पर जल छोड़ दिया जिसे सेना समेत रावण जल में डूबने लगा। इसके घटना के बाद जब रावण ने दूसरी बार सहस्रबाहु पर आक्रमण किया तो सहस्रबाहु ने रावण को कुछ समय के लिए बंदी बना कर रखा था।