Somvati Amavasya 2025 Puja Mantra: अमावस्या तिथि का हिंदू धर्म में विशेष माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूर्वजों की पूजा और तर्पण करने से वे प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। पितृ दोष से मुक्ति के लिए पिंडदान और तर्पण के लिए भी इस दिन को विशेष माना गया है। जब अमावस्या का दिन सोमवार को आता है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा और विशेष मंत्रों का जाप करने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है और पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।
Somvati Amavasya 2025: पितृ दोष से मुक्ति के लिए जेष्ठ सोमवती अमावस्या पर करें इन मंत्रों का जाप
माना जाता है कि सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव की पूजा और विशेष मंत्रों का जाप करने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है और पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।
सोमवती अमावस्या 2025 तिथि
दृक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि 26 मई को दोपहर 12:11 बजे से शुरू होकर 27 मई को सुबह 8:31 बजे तक रहेगी। ऐसे में सोमवती अमावस्या 26 मई 2025 को मनाई जाएगी।
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- ॐ पितृ देवतायै नम:
- ॐ पितृ गणाय विद्महे जगतधारिणे धीमहि तन्नो पित्रो प्रचोदयात्।
- ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:
- ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:।
- ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्।
- गोत्रे अस्मतपिता (पितरों का नाम) शर्मा वसुरूपत् तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जलं वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः।
- गोत्रे अस्मतपिता (पिता का नाम) शर्मा वसुरूपत् तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जलं वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः।
- गोत्रे मां (माता का नाम) देवी वसुरूपास्त् तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जल वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः”
अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।
इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ।।
मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा ।
तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि ।।
नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा ।
द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।
देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।
अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि: ।।